Wednesday, February 13, 2013

इंद्रधनुषी कविताः आसमानी


आसमानी...
कुछ ऐसा ही रंग,
जैसे लफ़्ज हैं,
पंखुड़ी, तितली, रोली
जैसे तुलसी-दल,
या दूर्वादल

जैसे गौरेये का पंख खुजाकर उड़ना
जैसे मुस्कुराना नवजात का
मीठे सपने में..

सपनों को उड़ने दो
उड़ने को आसमान चाहिए
उड़ने को पंख नहीं, अरमान चाहिए
उनको पूरने को सामान चाहिए

जिनको जीतना है जग
जिनके सपने अरमानी है
सपनों का रंग
आसमानी है

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

रात में आता सपना, जामुनी रंग दिखाता है।

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .....
उत्तम रचना ....