Tuesday, June 4, 2013

सुनो! मृगांकाः35: दास्तां आगे और भी है...

देरी हमेशा स्थितियों को जटिल कर देती है...लेकिन बीती रात के हर पल ने, राहत ही दी थी मृगांका को। थकान से चूर बदन, लगातार सड़क का सफर, अभिजीत को मौत के मुंह से खींचकर लाई थी मृगांका।

पलकें नींद से बोझिल हो रही थीं। पापा काउंटर पर जाकर बिल देने चले गए थे, उनको रोकना भी जरूरी था। अभिजीत को कभी पसंद नहीं आता..उसने हमेशा अपने लिए वही सबकुछ चाहा था जो एक निपट कमजोर आम इंसान को हासिल होता आय़ा है। पापा अगर अस्पताल का बिल भी देते तो उसके स्वाभिमान को चोट पहुंचती।

सरगना जैसे दिखते उस शख्स ने भी जोर दिया था कि अभिजीत को पांच सितारा नर्सिंग होम न ले जाया जाए, लेकिन इस बात पर मृगांका अड़ गई थी...आप मुझसे ज्यादा जानते हैं अभि को? वह शख्स खिसिया-सा गया था।

कुरसी पर अधलेटी हो गई थी मृगांका...एक चैन-सा था..लेकिन मन कहीं दूर उड़ रहा था।

तब..जब अभिजीत और उसके प्यार की कहानी पापा को पता न थी, न मम्मी को...तब, जब सड़क दुर्घटना के बाद इक़रार हुआ ही था, तब जब मृगांका ने अभिजीत को कहा था कि मुझे लगता है कि तुम्हारा-मेरा पिछले जन्मों का रिश्ता है और अभिजीत ने बड़े प्यार से कहा था, ..और वो रिश्ता कौन-सा था?...तब, जब अभिजीत ने सप्तपर्णी के पेड़ के नीचे बैठाकर उबली हुई चाय पिलाई थी उसे...मम्मी की किसी दूर की बहन ने एक रिश्ता भेजा था।

मृगांका, अपसेट हो गई थी। उसका जन्मदिन था और अभिजीत ने महज हैप्पी बर्थडे का एक संक्षिप्त मेसेज भर भेजा था...कुढ़ रही थी अंदर से। उदासी घने मेघ की तरह छा गई थी।

...रात को नौ बजे के बाद फोन किया था अभिजीत ने...लाल-पीली होती मृगांका ने फोन तो उठा लिया, लेकिन गुस्सा और उदासी, कुढ़न और नाराज़गी सब आवाज़ की तल्खी में जाहिर हो गया था।

कितने प्यार से अभिजीत ने समझाया था उसको। कभी उदास मत होना मृग, तुम उदास हो जाओगी तो मेरी ऊर्जा का स्रोत सूख जाएगा...।

...जैसे वो सूख रही है,...अभिजीत, उठो ना...मुझसे बातें करो। जब कहोगे, वही तुम्हारा फेवरिट पीला लिबास पहन कर आउंगी तुम्हारे सामने...तब कहना मुझे सूरजमुखी...अमलतास...छोटू...चांद...कुछ भी। तेरे बिना दुनिया की हर शै बेमानी है।

'आप चाय पिएंगी?'--सरगना जैसे उस कड़ियल शख्स ने मुलायमियत से पूछा। मृगांका ने 'हां' कहा, तो वो मुस्कुरा उठा, 'वैसे आप पीती तो नहीं।'

'आपको कैसे पता?'

'मैडम, आप मुझे नहीं जानतीं, लेकिन मैं ही नहीं, मेरे सारे साथी आपको अच्छी तरह से जानते हैं...आप का जिक्र अभिजीत सर हर वक्त किया करते थे, वो जो भी करते आपके नाम से करते थे।'

'अच्छा...!'--मृगांका को एक बार फिर हैरान होना पड़ा। 'वैसे, आपने अपना परिचय दिया नहीं, अब तो यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आप मेरे बारे में काफी कुछ जानते हैं...'

'मैडम, मैं हूं भरत किस्कू...झारखंड के गिरिडीह से। कभी ले चलूंगा आपको अपने गांव, तब आपको पता चलेगा, कि हमारे सारे साथियों के बीच अभिजीत जी को इतना क्यों सम्मान दिया जाता है। फिलहाल तो यह चाय पीजिए।'

मृगांका ने चाय का प्याला लिया और उसे सुड़कने लगी। अभि, देखो न मैंने चाय भी पीनी शुरू कर दी, आते क्यों नहीं ताली बजाते हुए, मेरे कंधं पर हाथ रखो, कहो ना कुछ...मृगांका की आंखें पनीली हो गईं।

प्रशांत डॉक्टर के साथ लौट आया था। डॉक्टर ने बताया कि अंदरूनी अंगों की कोशिकाओं में डिकेइंग (सड़न) को रोकने में वक्त लगेगा, लेकिन ये नामुमकिन नहीं। उसे उम्मीद थी को दो -तीन घंटों में अभीजीत को होश आ जाएगा।

मृगांका ने पापा और अभिजीत को मां को आराम करने को कहा।

उधर से टहलती हुई एक नर्स आई। चौड़े नीले बॉर्डर की सफेद साड़ी में।  कुरसी पर सिर टिकाए मृगांका से उसने पूछा, थोडे प्यार और थोड़े तहकीकाती आवाज में, 'कौन लगता है मरीज आपका...?' मृगांका इस अचानक के सवाल से थोड़ी हड़बड़ा-सी गई। नर्स ने फिर पूछा, 'पति है आपका...?'

'हां'...मृगांका के मुंह से निकला।

'बेटा, पति बीमार हो तो पत्नी को परेशानी तो होती ही है। लेकिन, हिंदू लड़की को कभी भी सिंदूर लगानी नहीं भूलना चाहिए।'

मृगांका को लगा कि घर की कोई बुजुर्ग औरत उसे समझा रही हो। उसका मन किया कि नर्स को कहे कि वह अपने काम से मतलब रखे, लेकिन कह नहीं पाई। लेकिन जवाब कुछ और ही निकला मुंह से, मानो ज़बान पर अपना कोई नियंत्रण ही न हो,---'जी गलती हो गई।'

नर्स गई और थोड़ी देर में आ भी गई। हाथों में सिंदूर का पैकेट था, 'लगा ले बेटी, आयु बढ़ेगी तेरे पति की...भरोसा रख।' मृगांका ने चुटकी भर सिंदूर लिया...लेकिन रूक गई। सामने देखा तो प्रशांत डॉक्टर के साथ खड़ा था। भरत किस्कू की नजर भी उसी पर टिकी थी।

अपनी मांग के कोने में मृगांका ने सिंदूर डाल ही दी। नजर फिर से उठी, तो देखा प्रशांत मुस्कुरा रहा था...




...जारी

3 comments:

तुषार राज रस्तोगी said...

आपकी सर्वोत्तम रचना को हमने गुरुवार, ६ जून, २०१३ की हलचल - अनमोल वचन पर लिंक कर स्थान दिया है | आप भी आमंत्रित हैं | पधारें और वीरवार की हलचल का आनंद उठायें | हमारी हलचल की गरिमा बढ़ाएं | आभार

सुनीता said...

Xcllnt... mode of way

keep it on...

eha said...

मौत को भी मात...