गुस्ताख़

मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...

Tuesday, August 26, 2008

एक कहानी

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एक थे सेठ जी। जैसा कि आम तौर पर कहानियों में होता है, सेठ जी बड़े दयालु थे। और प्रायः पुण्य इत्यादि करने के वास्ते हरिद्वार वगैरह जाते रहते ...
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Tuesday, August 19, 2008

मुसलमानों को घर क्यों नहीं मिलता?

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ये सवाल पिछले दिनों शबाना आज़मी ने उठाया. कि हिंदुस्तान में मुसलमानों को घर नसीब नहीं। फिर एक बैठक के दौरान माननीय सईद नकवी ने भी बयान दिया ...
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Wednesday, August 13, 2008

सेकुलर चैनलों की खुल गई पोल

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टीवी देख रहा हूं.. चैनल बम बम भोले की रट लगाते लोगों के एंबियांस से गुंजायमान है। एनडीटीवी पर शेखी बघारते बड़े पत्रकार जम्मू को नजरअंदाज़ कर...
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अभिनव चमत्कार को सलाम

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चमत्कार हमारे देश में होते रहते हैं.. और हम चमत्कारों के आगे नतमस्तक भी होते रहते हैं। देश ही चमत्कार की वजह से चल रहा है। जितना दूसरे देशों...
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Wednesday, August 6, 2008

ये दोस्ती हम... नहीं...तोडेगें

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कहते हैं जिंदगी छोटी है और दोस्तों का होना अपने आप में बड़े भाग्यवान् होने का परिचायक है। पिछले रविवार को मित्रता दिवस था तो लगा कि दोस्तों ...
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Tuesday, August 5, 2008

मंगल ठाकुर की मैथिली कविता

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मांगिक पेट भरैय छी यौ जौं शिव जनताह हमर कलेष तौं दुख हरताह यौ एसगर दिवस बिताबैं मंगल दुख की गाइयब यौ दुख दारुण अछि हमर महादेव जौ दुख हरता यौ
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क्षणिका

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आस भरोसक टाट लगाओल, आँग समांगक ठाठ बनाओल, मुदा घुरतइ इ दिन के फेर, की हरता शिव विधि के टेर भावानुवाद- ( आश-भरोसे की टाट लगाई, अपनों के क...
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