गुस्ताख़
मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...
Thursday, February 24, 2011
अथ 'पहुंचेली' कथा उर्फ....मुहब्बत एगो चीज है-तीसरा हिस्सा
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... अचानक आंखें खुली तो सूरज बाहर कहीं बहुत ऊपर उठ आया है इसका अहसास हो रहा था। रात का नशा सिर पर ऐसे चढा हुआ था मानो किसी ने चक्की रख दी ह...
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Monday, February 21, 2011
बाली उमरिया में कमर दर्द
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बीमार हूं..। कमर और घुटने में दर्द है। लगता है किसी ग़ज़ल को सुन लिया है खुदा ने। दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह, फिर चाहे दीवाना क...
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Wednesday, February 9, 2011
अथ 'पहुंचेली' कथा-दूसरी किस्त
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....हाथ की सिगरेट राख हो गई। 'पहुंचेली' पता नहीं किधर निकल ली। मैंने धीरे से बाहर झांका। मन का अंधेरा खिड़की बाहर दिखने लगा था। मच्छ...
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Sunday, February 6, 2011
अथ 'पहुंचेली' कथा उर्फ़ मुहब्बत एगो चीज है
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मैं अपने लैपटॉप के ठीक अपने लैप पर लेकर बैठा हूं। फेसबुक खुला पड़ा है...देख रहा हूं कितने लोगों ने दोस्ती के लिए अनुरोध भेजा है..कितने लोगों...
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Friday, January 28, 2011
जाड़े की सुबह-कविता
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बहुत सुबहों के बाद, आज सुबह जगा, पाया, आज बहुत ठंड है, खोजता रहा कहीं गरमाहट, उम्मीद की... लाल सूरज भी सिकुड़ता-सा लगा.. कोहरा तो नहीं...
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Tuesday, January 25, 2011
ये किसका गणतंत्र है...
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ये किसका गणतंत्र है? पूरे देश का या सिर्फ खास लोगों का। और देश है कहां...देश किसके लिए काम कर रहा है? क्या वक्त आ गया है कि जनता सड़कों पर ...
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Monday, January 24, 2011
अब कौन मिलाएगा सुर...
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बहुत पहले, दूरदर्शन पर फिलर चला करता था... मिले सुर मेरा तुम्हारा.. । दो धारावाहिकों के बीच-खासकर रविवार को-हमें मिले सुर मेरा तुम्हारा सुन...
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