गुस्ताख़
मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...
Thursday, March 17, 2011
अपने मुंह...मियां..(होली विशेष)
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लेखक को दो चीज़ों से बचना चाहिए : एक तो भूमिकाएँ लिखने से, दूसरे अपने नजदीकी लेखकों के बारे में अपना विचार प्रकट करने से। यहाँ मैं दोनों भू...
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Thursday, March 10, 2011
सिनेमा-राजा रविवर्मा का असर
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राजा रवि वर्मा भारतीय चित्रकला के इतिहास में एक खास स्थान रखते हैं। भारतीय चित्रकला के सौंदर्यबोध को उन्होंने एक जीवंत छवि दी। बेशक उनपर यूर...
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Sunday, March 6, 2011
....मुहबब्त एगो चीज है-चौथी किस्त
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"दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे, डर है कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे।" हम नंबरों को अपने फोन में सुरक्षित कर लेते हैं...आदमी नंब...
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Saturday, March 5, 2011
सिनेमाः प्रचार के निहितार्थ- दूसरी किस्त
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शुरुआती फिल्मों के विज्ञापनों पर रहा ललित कलाओं का असर, बाद में शुद्धतावादियों को लगी हेठी सजीव फोटॉग्रफी जैसे शब्दों के विज्ञापनों में इस...
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Thursday, March 3, 2011
सिनेमाः प्रचार के निहितार्थ
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7 जुलाई 1896...टाइम्स ऑफ इंडिया...। भारत में प्रदर्शित होने वाली पहली फिल्म का प्रचार के लिए कुछ वैसा ही प्रकाशित हुआ था, जैसा आजकल अखबारों ...
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Thursday, February 24, 2011
अथ 'पहुंचेली' कथा उर्फ....मुहब्बत एगो चीज है-तीसरा हिस्सा
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... अचानक आंखें खुली तो सूरज बाहर कहीं बहुत ऊपर उठ आया है इसका अहसास हो रहा था। रात का नशा सिर पर ऐसे चढा हुआ था मानो किसी ने चक्की रख दी ह...
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Monday, February 21, 2011
बाली उमरिया में कमर दर्द
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बीमार हूं..। कमर और घुटने में दर्द है। लगता है किसी ग़ज़ल को सुन लिया है खुदा ने। दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह, फिर चाहे दीवाना क...
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