गुस्ताख़

मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...

Wednesday, August 31, 2011

बुंदेलखंड की बेटियां

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सरकारी योजनाओं का जंजाल अनपढ़ गांववालों के लिए एक उलझाऊ तानाबाना है। इसी तानेबाने में फंस कर रह गई उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष वृक्षारोपण ...
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Thursday, August 25, 2011

लोकतंत्र-लोकतंत्रः कविता

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लोकतंत्र-शोकतंत्र हो गया वोटतंत्र वोटतंत्र-चोटतंत्र शोषण का एक यंत्र लोकतंत्र शोकतंत्र लूट-खसोटतंत्र ...
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Wednesday, August 24, 2011

फलक (फेसबुक लघु कथाएं)- तीन उम्दा रचनाएं

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मित्रों, नई मीडिया के सामने आने पर हमने सोचा की कथा के स्वरुप में भी एक बदलाव जरुर आना चाहिए। फेसबुक पर इसी अंदाज में रवीश कुमार लप्रेक (लघु...
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Thursday, August 18, 2011

राहत के सूखे चैक- बुंदेलखंड का सच

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बुंदेलखंड का त्रासदी सिर्फ बारिश की कमी ही नहीं है। प्रशासन में समझदारी और संवेदनशीलता की कमी हालात को बदतर बना रहे हैं। सरकारी मशीनरी के चक...
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Monday, August 15, 2011

चल उड़ जा रे पंछीः बुंदेलखंड का सच

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पिछले पोस्ट से आगे... बांदा जिले में ही सूखे की कहानी का यह सबसे बुरा किस्सा है। गांव में सारे पानी के स्रोत सुख गए। एक धनी-मानी घर को छोड...
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Saturday, August 13, 2011

हार या हाराकिरीः क्रिकेट के रणछोड़

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भारत की टीम के तीसरे टेस्ट मैच भी हारने के बाद, मैं कोई विशेषण नहीं जोड़ूंगा, कुमार आलोक ने अपने फेसबुक स्टेटस को कुछ यूं अपडेट किया है, ...
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Wednesday, August 10, 2011

बेपानी होते समाज की कहानीः बुंदेलखंड का सच

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पिछली पोस्ट से आगे...  पानी की कमी ने बुंदेलखंड के समाज को बेपानी बना दिया है। बादल रुठे, तो केत वीरान हो गए। हर गांव में कई बदोलन बाई हैं...
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