गुस्ताख़

मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...

Monday, May 14, 2012

अथ मुर्गोपाख्यानम्

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जब भी वैशाली मेट्रो स्टेशन से उतरकर घर की ओर प्रयाण करता हूं, सेक्टर चार के मार्केट में छिले-छिलाए मुर्गे नजर आते हैं। उनको भून कर पकाने वा...
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Saturday, May 12, 2012

सुनो! मृगांका-भाग तीन

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आने वाला पल जाने वाला है... खट्...खट्...खट्। कुल्हाड़ियां चल रही थीं। हरे बांस पर। पिता का शव आंगन में तुलसी चौरे के पास रखा था। मां दह...
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Thursday, May 10, 2012

वेन यू आर इन शिट्

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आज एक कहानी सुनाने का मन कर रहा है। बहुत शिक्षाप्रद कथा है। नाम है गुस्ताख लेकिन कसम बादलों के पीछे बैठे पत्थर के मूरतों की...कहानी धांसू ह...
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Monday, May 7, 2012

सुनो! मृगांका-पूछो न मैंने कैसे रैन गुजारी...

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एकः पूछो न मैंने कैसे रैन गुजारी... सू रजमुखी जैसी उस लड़की का घोषणापत्र था, मैं ही हूं मृगांका।  इस आत्मविश्वास भरे घोषणापत्र के जवाब ...
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सुनो! मृगांका...

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(साल भर हुए नॉन फिक्शन लिखते-लिखते खुद को जांचने के लिए क्या मैं फिक्शन भी लिख सकता हूं..मैंने एक कथा लिखनी शुरु की थी। कथा चार किस्त से ...
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Saturday, May 5, 2012

वर्तमान बनाम विस्मृति

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अ भी हाल ही में घर गया था। झारखंड। मधुपुर। ढाई साल बाद जाने का मौका मिला। पता नहीं इतना इमोशनल क्यों हूं. अपने घर को, अपने शहर को नजदीक से ...
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Wednesday, May 2, 2012

सूरजमुखी की याद में हरे पन्ने

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अभी-अभी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमोह से ट्रेन पकड़ी है। गोमोह पहले सिर्फ गोमोह था. अब इसके नाम के आगे नेताजी सुभाष का नाम भी है। कारण, ने...
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