गुस्ताख़
मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...
Tuesday, June 26, 2012
सुनो मृगांका:15: तन्हाईयां गुफ़्तगू करती हैं अक्सर...
›
अभिजीत के आंखों के आगे का अंधेरा छंटा, तो दर्द भी थोड़ा काबू में आता लगा। गाड़ी जसीडीह स्टेशन के बाद अजय नदी को भी पार कर चुकी थी। इस रास्त...
2 comments:
Saturday, June 23, 2012
गैंग्स ऑफ़ वासेपुरः जियअ हो बिहार के लाला
›
गैंग्स ऑफ वासेपुर के प्रोमो देखकर कसम खाई थी कि फिल्म पहले ही दिन देखूंगा। देखी...और क्या दिखी। वाह। बहुत दिनों बाद फिल्म देखकर मजा आ गया। ...
5 comments:
Thursday, June 21, 2012
सुनो मृगांका:14: मैं कभी न मुस्कुराता, जो मुझे ये इल्म होता...
›
मैं कभी न मुस्कुराता जो मुझे ये इल्म होता कि हजारों ग़म मिलेंगे। मेहदी हसन की गाई इन पंक्तियों को याद करता हुआ अभिजीत प्लेटफॉर्म पर बैठा रह...
5 comments:
Monday, June 18, 2012
दाढ़ी महात्म्यः हिस्ट्री-पॉलिटिक्स-सोशियोलजी
›
दाढ़ी केवल फिजिक्स-केमेस्ट्री-बॉयोलॉजी नही , हिस्ट्री-पॉलिटिक्स-सोशियो भी है... बचपन में हीर-रांझा देखी थी , बेतरतीब-भगंदर टाइप दाढ़ी में...
1 comment:
Sunday, June 17, 2012
डियर डैड...एक खत दिवंगत बाबूजी के नाम
›
डियर डैड, सादर प्रणाम, कहां से शुरु करुं...आज से ही करता हूं। आज अंग्रेजी के एक अख़बार के पहले पन्ने पर बिस्किट के एक ब्रांड का विज्ञा...
20 comments:
Saturday, June 16, 2012
जंगल, बारिश, सम्मोहन और भूलभुलैया
›
मध्य प्रदेश के जिस इलाके में हूं, जंगल अपने शबाब पर है। इलाका अर्ध-शुष्क है। राजस्थान नजदीक है। यहां के जंगल भूगोल की भाषा में उष्णकटिबंधीय...
3 comments:
Tuesday, June 12, 2012
मुसाफिर हूं यारो...एमपी में
›
कभी-कभी रतजगा उतना बेरहम नहीं होता। यूपी में रहते हों, रात में लगातार छह घंटे तक बिजली न आए, कहीं जाने के लिए सामान पैक करना हो, अँधेरा हो,...
3 comments:
‹
›
Home
View web version