गुस्ताख़
मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...
Thursday, December 27, 2012
ले बलैया...इ साल भी गया!
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ससुरा इहौ साल बीत गया। हम मान कर चल रहे हैं कि बीत गया। सब निगोड़े रोते रहे। वही महंगाई, वहीं मुद्रास्फीति, वही 32 लाख रूपये का गुसलखाना.....
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Wednesday, December 12, 2012
...और क़यामत नहीं आई
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क़ यामत भी नेताओ और माशूकाओं की तरह धोखेबाज़ है। आते, आते नहीं आती है। वायदा करती है और नहीं आती है। कई साल से टीवी वाले चीख रहे थे, 1...
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Monday, December 3, 2012
भोपाल गैस त्रासदीः दो कविताएँ
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व ह भीड़ नहीं - भेड़ें थी । कुछ जमीन पर सोए सांसें गिन रही थीं। दोस्तों का रोना भी नसीब न था। चांडाल नृत्य करता शहर, ऐ दुनिया के लोग; अप...
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सुनो ! मृगांका :27: साक़ी शराब ला, कि तबियत उदास है...
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अभिजीत की बांहो का घेरा कसता जा रहा था...मृगांका नींद के आगोश में डूबती चली गई। डूबती चली गई। इतनी गहरी और आश्वस्तिदायक नींद थी कि लगा मृगा...
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Friday, November 30, 2012
सुनो! मृगांका:27: तारे सब बबुना, धरती बबुनिया
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अभिजीत खिड़की से कूद कर आया था, उसने कहा था कहा चोरी से मिलने का मज़ा हमेशा मीठा होता है। अचानक मृगांका को लगा कि उसकी गरदन के पीछे किसी ...
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Monday, November 26, 2012
हा सचिन! हा हा सचिन
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बात तब की है जब हमारी मूंछों के बाल उगे नहीं थे। तब तक सन् 94 नहीं आया था। तब तक सचिन ने सिंगर कप में पहला सैकड़ा नहीं जड़ा था। लेकिन तब भी...
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Thursday, November 22, 2012
सुनो ! मृगांका :26: अब मुझको भी हो दीदार मेरा
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मृगांका और प्रशांत जब ड्रॉइंग रूम में आए तो देखा सोफे पर एक महिला बैठी हैं। गौर वर्ण, हिमालय की बर्फ सी धवल केशराशि, भौंहे भी सफेद हो चलीं ...
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