गुस्ताख़
मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...
Tuesday, July 23, 2013
कर्नाटक के विकास की अंतर्गाथा
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गरमी झेलता हुआ, गुलबर्गा में अपनी बालकनी से डूबते सूरज को देखता हूं। गुलबर्गा में डूबता हुआ सूरज भी दहकता हुआ लगता है। दिल्ली से ...
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Sunday, July 21, 2013
कुछ तस्वीरें--रोहन सिंह
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फोटॉग्रफी की कला अपने आप में पूरी पत्रकारिता है। हमारे साथी रोहन सिंह हाल ही में कच्छ के रन गए थे, वहां डॉक्युमेंट्री शूट के दौरान कुछ तस्व...
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Monday, July 15, 2013
सुनो मृगांका:38: जलते हैं जिसके लिए, मेरी आंखो के दिए
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पटना से झारखंड में अभिजीत का गृहनगर बहुत दूर नहीं। ट्रेन की बजाय, भरत किस्कू ने ज़ोर दिया कि सड़क मार्ग से यात्रा की जाए। मृगांका अभिजीत ...
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Thursday, July 4, 2013
लालू-नीतीश-पासवान पुराण भाग-दो
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कुमार आलोक लेख को किस्सागोई के अंदाज़ में कहना जानते हैं। लालू की शैली और उनकी राजनीति पर न जाने कितना कुछ लिखा गया है, लेकिन कुछ किस्से ऐस...
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Tuesday, July 2, 2013
आवारेपन का रोज़नामचाः बहमनों की धरती पर
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इमली का पेड़ झुलस रहा था...गरमी में। दिल्ली में भी गरमी है...झुलसाने वाली तो नहीं...लेकिन उत्तराखंड की बाढ़ के बाद बारिश से सहमे हुए ल...
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Sunday, June 30, 2013
लालू-पासवान-नीतीश पुराण भाग-एक
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ये आलेख कुमार आलोक का है। कुमार आलोक, राजनीति कवर करने वाले विचारवान पत्रकार हैं। खासकर वामपंथी राजनीति पर खास नजर भी रखते हैं और श्रद्...
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Sunday, June 16, 2013
दिवंगत बाबूजी के नाम बेटे का एक खत
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डियर डैड, सादर प्रणाम, कहां से शुरु करुं...आज से ही करता हूं। आज अंग्रेजी के एक अख़बार के पहले पन्ने पर बिस्किट के एक ब्रांड का...
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