गुस्ताख़
मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...
Monday, December 28, 2015
ग्लोबल वॉर्मिंग कहीं कारोबारी साजिश तो नहीं?
›
पैरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में लंबी बहस के बाद आख़िरकार सारे देश एक समझौते तक पहुंचे लेकिन इस समझौते से मैं बहुत मुतमईन नहीं हूं। कई सवा...
1 comment:
Tuesday, December 15, 2015
आओ फिर से पुकारो मुझको
›
आओ फिर से पुकारो मुझको बंद किवाड़ों पर हल्के से दस्तक तो दो किवाड़ें मन की कहां बंद होती हैं। किवाड़ो पर लगे सांकल को खटखटाना इक बार...
मार प्यार की थापें
›
बंद किवाड़ लगा है सांकल मार प्यार की थापें आसमान को बंद कहां कर पाओगे तुम पट के भीतर गगन मुक्त है पवन मुक्त है मुक्त हमेशा...
Monday, December 14, 2015
ग्लोबल वॉर्मिंग पर ठंडा रुख़
›
ग्लोबल वॉर्मिंग यानी वैश्विक तापवृद्धि की वजह से दुनिया भर के निचले इलाके डूब जाएंगे और सुन्दरबन से लेकर मालदीव जैसे इलाकों का अस्तित्व खत्...
Sunday, December 6, 2015
हम फिदा-ए लखनऊ
›
उन्नाव के बाद चलती हुई गोमती फिर कहीं किसी अंजान सी जगह पर रूकी थी। रुकना गोमती एक्सप्रेस के लिए, और उसके मुसाफिरों के लिए कोई खबर नहीं थी।...
3 comments:
Friday, December 4, 2015
जिसे ढूंढा ज़माने में मुझी में थाः तमाशा
›
इससे पहले कि आप किसी नामी-गिरामी फिल्म समीक्षकों की समीक्षा को आधार बनाते हुए मेरी पसंद पर लानतें भेंजे, मेरी पहली बात; पिछले पांच साल में ...
1 comment:
Sunday, November 29, 2015
जलवायु परिवर्तन पर भारत का सहिष्णु कदम
›
आमिर खान ने पत्नी के मन की बात क्या कही, भूचाल आ गया। आना ही था। आमिर ख़ान ने कह दिया कि भारत में बढ़ती असहिष्णुता की वजह से उनकी पत्नी भार...
2 comments:
‹
›
Home
View web version