गुस्ताख़

मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...

Sunday, September 23, 2018

क्या कोई आकर हमें हिंदुत्व का पाठ पढ़ाएगा?

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ध्रुवीकरण और एकता की संघीवादी खोज के पीछे हिंदू धर्म को वह सब बनाने की ललक भी है जो वह नहीं हैरू उसे 'सेमिटाइज' करने की ललक, ताकि ...
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Friday, September 14, 2018

हैप्पी हिंदी डे डूड

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हिंदी को लेकर कई तरह की दुकानदारियां चल रही हैं, चलती आ रही हैं और चलती ही रहेंगी. आम जन हिंदी में लिखने को साहित्य समझता है. साहित्यकार भ...
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Wednesday, August 15, 2018

मैंने वीएस नायपाल को शब्दों में देखा है

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सर विदियाधर सूरजप्रकाश नायपॉल यानी वीएस नायपॉल नहीं रहे. भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त इस उम्दा लेखक का जन्म त्रिनिदाद में में 17 ...
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Friday, July 27, 2018

नीलोत्पल मृणाल का उपन्यास डार्क हॉर्स साहित्य के लोकतंत्रीकरण का सुबूत है

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डार्क हॉर्स उपन्यास में आपको वही धारा नजर आएगी जो यूपी 65 या बनारस टॉकीज या मुसाफिर कैफे में दिखाई दी थी. असल में चेतन भगत की लोकप्रियता न...
Monday, July 23, 2018

मैं तो एक मुश्ते गुबार हूं, आजाद और भगत सिंह को याद करते बटुकेश्वर दत्त का संस्मरण

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हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के कमांडर इन चीफ चन्द्रशेखर आज़ाद का आज जन्मदिवस है. पंडित जी के सपनों का समाजवादी भारत था, जिसमें सभी...
Friday, July 13, 2018

उम्मीदों और आशाओं का नया पाठ है 102 नॉट आउट

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आसानी से कहे जाने वाली इस फिल्म के खत्म होने पर आप थोड़े भावुक हो सकते हैं. लेकिन आपके पास तब जिंदगी को महज बिताने नहीं बल्कि जीने के कुछ ...
Wednesday, June 20, 2018

पीयूष सौरभ की एक कविता

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पीयूष सौरभ लखनऊ आर्ट ऐंड क्राफ्ट कॉलेज से ललित कला में परा-स्नातक हैं. जितनी सफाई से उनके ब्रश कैनवस पर चलते हैं, उतनी ही कारीगरी वह शब्दों...
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