गुस्ताख़

मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...

Sunday, April 18, 2021

पंचतत्वः जंगलों का प्रबंधन स्थानीय समुदायों के हाथों में क्यों नहीं देते!

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उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ जिले में एक गांव है, सरमोली. यहां की वन पंचायत को राज्य की सबसे बेहतरीन जगहों में गिना जाता है. वजह! इस वन पंचायत की...
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Monday, March 8, 2021

पंचतत्वः अधिक पड़ता है निचले तबकों और औरतों पर जलवायु परिवर्तन का असर

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दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन हो रहा है इस बात में किसी को कोई शक नहीं हो सकता और इसके असरात भी हर तबके पर अलग किस्म से पड़ रहे हैं. जलवायु ...
Tuesday, February 23, 2021

पंचतत्वः एक संकल्प हमारे नदी पोखरों के लिए भी

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पूरब के महत्वपूर्ण और पवित्र माने जाने वाले त्योहार छठ का एक अभिन्न हिस्सा है नदी तालाबों में कमर भर पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देना...
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Tuesday, December 15, 2020

पंचतत्वः गाफिल गोता खावैगा

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बारिशें हमेशा चाय-पकौड़े, गीत-गजलें और शायराना अंदाज लेकर नहीं आतीं. कुछ बरसातों में दिल तोड़ने वाली बात भी हुआ करती हैं. नहीं, आप मुझे गलत ...
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Monday, December 7, 2020

पंचतत्वः मिट्टी की यह देह मिट्टी में मिलेगी या जहर में!

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 हम बहुत छोटे थे तब हमने कवि शिवमंगल सिंह सुमन की एक कविता पढ़ी थी आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठ...
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Sunday, September 13, 2020

हैप्पी हिंदी डे ड्यूड

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हिंदी के साथ कई समस्याएं हैं. पहली समस्या इसके दिवस का मनाया जाना है. अंग्रेजी भाषा का भी कोई दिवस है इस बारे में मुझे ज्ञात नहीं. हो, तो सम...
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Thursday, June 25, 2020

पुस्तक समीक्षाः जन के खिलाफ लामबंद तंत्र का किस्सा है वैधानिक गल्प

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यह वक्त, जिसे हम हड़बड़ियों में मुब्तिला लोगों का दौर कह सकते हैं, अधिकतर संजीदा लेखक या अप्रासंगिक होते जा रहे हैं या फिर समयबद्ध क्षरण क...
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