गुस्ताख़

मेरे अदब से सारे फरिश्ते सहम गए, ये कैसी वारदात मेरी, शायरी में है...

Friday, June 12, 2026

क्या टीएमसी के भीतर की हलचल सिर्फ सत्ता का गणित है, या सुरक्षा की राजनीति भी?

›
आपने कभी सोचा है कि तृणमूल के सांसदों-नेताओं का अचानक हृदय परिवर्तन कैसे हो गया? आंखों में काबा वाली गायिका-अभिनेत्री घोष को अचानक अयोध्याजी...
Thursday, May 7, 2026

कतरनी चावल चूड़ा और देवघर का पेड़ा

›
कुछ खुशबुएँ ऐसी होती हैं जो समय की धूल में भी धुंधली नहीं पड़तीं. वे हमारी इंद्रियों के किसी गुप्त झरोखे में दुबक कर बैठ जाती हैं और एक मामूल...
Thursday, April 16, 2026

पुस्तक चर्चाः डोढ़ाय चरित मानस आम आदमी का महाकाव्य और भारतीय लोकतंत्र का कच्चा चिट्ठा

›
मैं लंबे समय से कथा और कथेतर पढ़ता आ रहा हूं. माटी की अद्बुत गंध की वजह से रेणु जी का लेखन बहुत पसंद रहा है और रेणुजी के बारे में भाई गिरीन्...
Tuesday, March 31, 2026

महावीर का मार्ग: युद्धग्रस्त विश्व की रक्तिम क्षितिज पर शांति का सूर्योदय

›
मंजीत ठाकुर आज की दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है. अगर हम वैश्विक मानचित्र पर नजर डालें, तो शांति के टापू कम और संघर्ष के अंगारे ज्यादा नजर आ...
Saturday, March 21, 2026

सेमल: पर्यावरण, वन्य जीवन और साहित्य और जीवन दर्शन का पेड़

›
मंजीत ठाकुर इन दिनों सड़कों पर ऊंचे तने वाले तने हुए पेड़ों पर लाल बड़े और मांसल फूलों के खिलने का मौसम है. इन्हें देखकर मुझे हितोपदेश की कह...
Saturday, March 14, 2026

अफवाह, डर और बाजार: भारत में पैनिक बाइंग का सामाजिक मनोविज्ञान

›
आज रसोई गैस सिलिंडर देश की कथित कमी देश की सबसे महत्वपूर्ण समस्या बनी दिख रही है. जिसकी टाइम लाइन पर जाइए, यही दिख रहा है. मैं यह नहीं कह रह...
Thursday, February 26, 2026

AI के भय और इसके अत्यधिक इस्तेमाल पर छोटी टीप

›
आजकल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर लिखा जाने वाला लगभग हर दूसरा लेख किसी मर्सिए की तरह लगता है. हर किसी का ऐलान है, यह तकन...
1 comment:
‹
›
Home
View web version
Powered by Blogger.