Saturday, March 29, 2008

सेकुलर चैनल का रामायण


एनडीटीवी इनेजिन ने जब बड़े जोर-शोर से रामायण को फ्लैगशिप प्रोग्राम की तरह पेश किया, तो उम्मीद जगी थी कि रामायण को एक अलग कोण से देखने का मौका मिलेगा। शायद, राम के चरित्र और उनके व्यक्तित्व पर नई रौशनी की उम्मीद थी। लेकिन, एनडीटीवी का रामायण भी टीआरपी बटोरने का साधन लग रहा है।

रामानंद सागर के रामायण और नए रामायण धारावाहिक में वही संबंध है जो पुराने देवदास और नए देवदास में था। फर्क भव्यता का है। उमदा ग्राफिक्स और ज्यादा युवा राम, जो युवा दर्शकों तक पहुंच रखेंगे। पुराने लोग तुलना के लिए ही सही नए रामायण को देख रहे हैं।

लेकिन एकताकपूरत्व रामायण के नए संस्करण पर हावी है। कैकेयी समेत दशरथ की तीन रानियों की वेशभूषा पर ध्यान दिया है आपने? कैकेयी तो कुमकुम या कसौटी की किसी वैंप जैसी ही दिखती है। कोप भवन में जाने पर उसके सौंदर्य में और भी मारक निखार आया है। हिंदुत्ववादियों से माफी नामे के साथ कह रहा हूं कि मेरी यह भावना महज कैकेयी का चरित्र निभा रही अभिनेत्री के प्रति है। रामायण की माता कैकेयी के प्रति मैं पूरा सम्मान रखता हूं। बहरहाल, सीरियल में कैकेयी का चरित्र निभा रही लड़की अपने प्रदर्सन में राखी सावंतनुमा नहीं दिखने की कोई कोशिश नही करती।

मुझे नहीं पता कि रामायण की टीआरपी कितनी है, लेकिन इस सीरियल की गति बेहद धीमी है, लंबे-लंबे ऊबाई संवाद युवा लोगों को बोर ही करते हैं।

इतना सब होने पर भी एनडीटीवी को सेकुलर होने का दंभ छोड़ देना चाहिए।

2 comments:

shailesh said...

Apkay vichar uttam hai lakin kanhi na kanhi app purany teaher ki tarah lag rahy hai.

Rajiv K Mishra said...

हल्की-फुलकी बातों को तुम ज़्यादा बेहतर ढ़ग से पेश कर पाते हो। बढ़िया लगा।