इस संधि पर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पहले कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षर किया गया था. बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम को विश्वास है कि 'भारत इसके महत्व को समझेगा और उसी के अनुरूप आगे बढ़ेगा.'
अब प्रश्न है कि भारत विरोधी रवैए के बावजूद बांग्लादेश इतना आश्वस्त क्यों है? ध्यान रखना चाहिए कि बांग्लादेश और भारत के बीच गंगा सहित 54 प्रमुख नदियों का जल साझा है.
भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त तारिक ए. करीम ने हाल में कहा था कि 1996 की गंगा जल संधि ने यह दिखाया कि ‘‘संवेदनशील मुद्दों पर भी’’ सहयोग संभव है. अब बांग्लादेश को भारत विरोधी रुख भी अपनाना है, लगभग पाकिस्तान भी बन जाना है और पानी भी चाहिए. ऐसा कैसे होगा?
पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता फिलहाल निलंबित है और इसकी वजह से पूरे पाकिस्तान को दिक्कत हो रही है ऐसा पाकिस्तान के लोग मानते हैं. भारत का विपक्ष (और कुछ झंडू यूट्यूबर) भले ही शक कर रहा है और पूछ रहा है कि सिंधु का जल रखोगे किधर? तो मेरा प्रश्न यही है कि अगर संधि को खटाई में डालने से पाकिस्तान की मिर्च नहीं लगी है तो पानी के नाम पर जंग की धमकी वहां की सेना से लेकर बिलावल भुट्टो तक काहे दे रहे हैं?
खैर, बांग्लादेश पर लौटिए. वहां की मंत्री शमा ओबेद इस संधि को लेकर विश्वास जता रही हैं कि 'भारत इन बातों और इस साझा हित को ध्यान में रखते हुए सही निर्णय लेगा, ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों को किसी भी तरह की क्षति न पहुंचे।'
द्विपक्षीय संबंधों को क्षति पहुंचने की इतनी चिंता है तो भारत के परम शत्रु पाकिस्तान का बगलबच्चा बनने से बचना चाहिए था. अगर भारत इस पानी वाले मसले पर बांग्लादेश की बांह नहीं मरोड़ता है तो इसे कूटनीतिक फेलियर माना जाना चाहिए.