Wednesday, August 13, 2008

अभिनव चमत्कार को सलाम

चमत्कार हमारे देश में होते रहते हैं.. और हम चमत्कारों के आगे नतमस्तक भी होते रहते हैं। देश ही चमत्कार की वजह से चल रहा है। जितना दूसरे देशों का बजट होता है उतना तो हम घोटालों में खा जाते हैं। हर मुमकन चीज़ का घोटाला कर लेने और दलाली की सूरत निकाल लेने में हमें महारत हासिल है।
लेकिन एक और चमत्कार ये हुआ कि अभिनव बिंद्रा भारत के लिए अकल्पनीय स्वर्ण जीत लाए। देश उन्हें सलाम कर रहा है,मैं भी। देश को चमत्कारों की और नायकों की ज़रूरत रही है। सदा-सर्वदा से। आज अभिनव है, धोनी हैं,कल सचिन और गावस्कर थे। कपिल थे।
लेकिन इन चमत्कारों के पीछे कितना पसीना बहाना पड़ा है इन नायकों को, ये किसी ने जानने की जहमत नहीं उठाई। एक टीवी न्यूज़ चैनल की मानें, तो अभिनव के राइफल में छेड़छाड़ की कोशिश की बात भी सामने आ रही है। हमार समाने अचानक हीरोज़ उभर कर आते हैं, और हम उन्हे पूजने भी लगते हैं, टेनिस सनसनी सानिया, इरफान पठान, विश्वनाथन आनंद.. इंडिया टुडे जैसी पत्रिका के एक अंक ने तो आगरकर पर कवर स्टोरी कर दी थी.. आगरकर का आविर्भाव। कहां गए आगरकर..। दरअसल हम अपने हीरोज़ से हमेशा जीतने की उम्मीद करत ेहैं.. जो मेरे खयाल से हमेशा मुमकिन होता नहीं दिखता।
जीत को दोनों हाथों से थामना सावाभाविक ही है, लेकिन हार को भी खेल का हिस्सा मानकर आगे की तैयारी में जुट जाना क्या हम नहीं सीख सकते? वो भी तब जब हमें हारने की आदत हो गई हो।

3 comments:

Gajendra Thakur said...

अभिनव बिन्द्रा के पिता श्री ए.एस.बिन्द्रा और माता श्रीमति बबली बिन्द्रा को देश के इस पुत्र की सफलता पर शुभकामना।

Udan Tashtari said...

अभिनव को बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

nukhtachini said...

abhinav ne desh ka naam roshan kiya . kafi achcha likha aapne.