Wednesday, September 24, 2008

ऑस्कर की आशा

तारे ज़मीन पर ऑस्कर में नॉमिनेट होने के लिए चुन ली गई है.. अभी ऩॉमिनेट हुई नहीं है... लेकिन भारत के लोगों में इस फिल्म को लेकर बहुत उत्साह है। हर साल हम विदेशी भाषा वर्ग में अपनी फिल्म भेजते रहे हैं, लेकिन 1956 में पहली बार प्रविष्टि के लिए गई मदर इंडिया के बाद अब तक गंगा में बहुत पानी बह चुका है.. और हम दुनिया में सबसे अधिक फिल्में बनाने वाले देश बन गए हैं। लेकिन अभी तक स्थिति ये है कि हम महज तीन बार ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हो पाए हैं। पुरस्कार जीतना तो दूर की कौड़ी है।


नॉमिनेशन की बात की जाए तो 1956 में महबूब खान की मदर इंडिया और 1988 में मीरा नायर की सलाम बाम्बे के बाद 2001 में आशुतोष गोवारिकर की लगान इस वर्ग में पुरस्कार की दौड़ में शामिल हो सकीं।


लाख टके का सवाल ये है कि अगर हम बॉलिवुड का परचम दुनिया भर में फैलाने का खम ठोंकते हैं तो हमारी फिल्मो को संजीदगी के साथ क्यों नहीं लिया जाता। आखिर बर्लिन या कॉन जैसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों और ऑस्कर पुरस्कार समारोहों में हमारी नुमाइंदगी इतनी कमज़ोर क्यों होती है।
ऑस्कर में लगान का प्रदर्शन उत्साह बढाने वाला था लेकिन हम पुरस्कार पाने से चूक गए थे। 2002 में संजय लीला भंसाली की देवदास अवॉर्ड के लिए भेजी गई। फिल्म रीमेक थी और ट्रीटमेंट को लेकर चूक गई।


2003 में कोई आधिकारिक प्रविष्टि नहीं भेजी गई। 2004 में संजय सावंत की मराठी फिल्म श्वास और अगले साल यानी 2005 अमोल पालेकर की पहेली को नॉमिनेशन के लिए भेजा गया। खांटी भारतीय विषय पर बनी फिल्म पहेली भी ऑस्कर में नाकाम रही। 2006 में आमिर खान की अदाकारी और राकेश ओम प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म रंग दे बसंती भारत की प्रविष्टि थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक दस्तावेज की तरह बनी इस फिल्म ने युवाओं को काफी अपील किया, लेकिन वैश्विक दर्शकों को यह उतना अपील नहीं कर पाई, ऐसे में यह भी ऑस्कर में नॉमिनेट नही हो पाई।
2007 में विधु विनोद चोपड़ा की एकलव्य- द रॉयल गार्ड को भारत की ओर से नामित किया गया, लेकिन यह भी ऑस्कर के स्तर तक नहीं पहुंच पाई। वैसे, एकलव्य भारतीय दर्शकों को भी नहीं लुभा पाई थी, और कला के लिहाज से भी कमजोर फिल्म थी।


अब एक बार फिर अदाकार आमिर और निर्देशक आमिर दोनों को मौका मिला है, भारत के सिर ऑस्कर का सेहरा बांधने का। यूं भी तारे ज़मीन पर एक अलग किस्म की फिल्म है, जिसकी कहानी हटके है। फिल्म समीॿकों के साथ दर्शकों का भी भरपूर दुलार मिला है।


उम्मीद है कि लगान के ज़रिए ऑस्कर पाने में जरा से चूक गए आमिर इस बार ऑस्कर के तारे को भारत की ज़मीन पर ले ही आएंगे।

3 comments:

मौसम said...

hamarii duaayen hain...

Udan Tashtari said...

शुभकामनाऐं.

भवेश झा said...

bas yahaa bhi soch positive hi hai,