Saturday, November 15, 2008

ऐश्वर्य, रानी मुखर्जी और मैं

एक ओर एश्वर्य राय दूसरी तरफ़ रानी मुखर्जी। मैंने देखा ऐश्वर्य ने आँखों में कॉन्टैक्ट लेंस लगा रखा था, सलीके से कतरी हुई भौंहें, खूबसूरत पलकें... अथाह सौंदर्य। कैनवास के कच्चे रंग की तरह कि छूने से ही हाथों में लग जाएगा। हवा में उड़ती-सी भूरी जुल्फें। एकटक वह मेरी तरफ देख रही थी।

मेरे दाहिनी तरफ थी रानी मुखर्जी.. भूरी आंखों वाली इस कन्या ने कटाक्ष भरी निगाहें मेरी ओर कर रखी थीँ। पीठ पर डीप कट वाला ब्लाउज... मरून रंग की खूबसूरत साड़ी... सौंदर्य के इस जमावड़े में मैं नखदंतविहीन हो रहा था। बिषहीन तो खैर मैं पहले से ही हूं।

ऑटो के सामने वाले आईने पर पान के आकार के स्‍ीकर में- जिसे पता नहीं क्यों दिल का आकार माना जाता है- सलमान खान ने शर्ट उतार फैंकी थी। आईने के दाहिने कोने पर एक और स्टीकर था जिसमें पृष्ठभूमि से आती रेलगाड़ी और फोरग्राउंड में एक लड़की गठरी की तरह सिर झुकाए थी.. तुम कब आओगे? यह सवाल चस्पां था उस पर। आकृतियों में समानुपात जैसी कोई व्यवस्था नही..ठीक वैसे ही जैसे सड़क के दोनों ओर ऑटो के अगल-बगल से गुजरती गाड़ियों में आकार और रफ्तार का कोई अनुपात न था।

ऑटो आश्रम के उड़नपुल (फ्लाईओवपर) और उसके बाद मूलचंद के अंतःपथ (सब-वे) को पार कर अगस्त क्रांति पथ की ओर चला जा रहा था। इन सबके बीच दफ्तर की चिंता लगी थी। सैलरी में बढोत्तरी की किसी किस्म की संभावना नजर नही आ रहीष मुद्रास्फीति फर्जी तरीके से ८ दशमलव कुछ हो गया है। लेकिन मंहगाई घट गई हो, वैसा दिख नहीं रहा।

दफ्तर में काम का बड़ा बोझ इंतजार कर रहा है। छह राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, इलेक्शन डेस्क पर हूं, राज्यों का जनादेश कार्यक्रम जाना है... रंग-तंरग भी करना है.. चंद्रयान देश का झंडा चांद पर भेज रहा है.. क्या होगा अब.. हम तक तो चंदा मामा बना रहा, अब चंदा हमारा मामा नहीं रहेगा? बच्चों का लुभावना खिलौना नहीं रहेगा? कवि अपनी प्रेयसी की तुलना चांद से कर पाएंगे, गोकि देश का झंडा वहां जा लगा है?

ये मैं क्या सोच रहा हूं..ऑटो में बाई ओर से ऐश्वर्य और दाहिनी ओर से रानी कोई जबाव नही देती उनका चेहरा उतना ही खिला हुआ है जितना तब था जब मैं ऑटो में बैठा था। इंग्लैड पर भारती की जीत, मुद्रास्फीति कम होने या चांद पर तिंरगा पहुंचने की खबर का उनपर कोई असर नहीं है।
उनका सौंदर्य मेरा दुख कम क्यो नहीं कर पा रहा.. ।

3 comments:

Anil said...

जो सौंदर्य किसी का दुख कम न कर सके, वह नकली है।

Shiv Kumar Mishra said...

"मुद्रास्फीति फर्जी तरीके से ८ दशमलव कुछ हो गया है।"

"इंग्लैड पर भारती की जीत, मुद्रास्फीति कम होने या चांद पर तिंरगा पहुंचने की खबर का उनपर कोई असर नहीं है।"

"उनका सौंदर्य मेरा दुख कम क्यो नहीं कर पा रहा.. ।"

कुछ न कुछ कमी तो है. सौंदर्य की बात कर रहा हूँ. दुःख में तो कमी होने से रही.

*KHUSHI* said...

sundar kataksh purna lekh....