Sunday, January 26, 2014

हैप्पी रिप-बली डे

देश के लोगों, अगर आप मुझे पढ़ पा रहे हैं तो गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए। अगर आप न्यूजीलैंड जाकर दो हार के बाद एक टाई मैच से उत्साहित हैं, तो  गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए। अगर आप महंगाई से परेशान हैं, गैस, पेट्रोल, डीजल, हरी, लाल, पीली सब्जियों की बढ़ती कीमत से परेशान है, तो ज्यादा देर परेशान मत होइए, गणतंत्र दिवस में सुबह में राजपथ की परेड को टीवी पर देखिए, दूरदर्शन के कमेंटेटर की सधी आवाज पर किसी निजी चैनल की नर या मादा एंकर तेजी का तडका लगा देगी, परेशान काहे होते हैं, गणतंत्र दिवस के मजे लीजिए।

क्या हुआ जो  गणतंत्र दिवस रस्मी होकर रह गया है। क्या हुआ जो सरहद पर हमारे जवानों का सिर काट कर पड़ोसी भाग जाता है, क्या हुआ जो हमारे अपने देश में नक्सली हिसा में हमारे सुरक्षाकर्मी मारे जाते हैं, क्या हुआ जो हमारे नेता झूठ बोलते हैं, और मुकर जाते हैं। क्या हुआ जो घोषणापत्रों के खोखले दावों को हम याद भी करना पसंद नहीं करते, आपके दिल बहलाने के लिए पेश है--गणतंत्र दिवस।

टीवी पर करन जौहर को ठुमके लगाते देखिए, मलाइका अरोड़ा के क्लीवेज में झांकिए, किरन खेर के जबरदस्ती के डिम्पल्स में अंकल मदहोश हो गए हैं, नच बलिए में पूरा भारत नाच रहा है, कपिल शर्मा के साथ पूरा देश हंस रहा है, गुत्थी उसके शो से अलग हो गई है, यह सबसे बड़ी समस्या ठहरी। आइए, गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए।

जिनके लिए खेतों के सूखे से चिंताजनक है त्वचा का रूखापन, धरती में बित्ते-बित्ते भर की दरारों से विकट समस्या है एड़ियां की दरारे-बिवाईयां, भुखमरी से भयंकर विपदा जिन्हें डैंड्र्फ (रूसी) की लगती है...बेरोजगारी से बड़ी समस्या बालो की कमजोरी और दोमुंहापन...आइए हम सब कपड़े पर लगे दागों से जूझते हैं...आइए उन सबको मैं गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देता हूं।

आइए, हम सभी मिलकर धोनी की हार पर मर्सियां पढ़ें, (जवानो का सिर काटा गया तो क्या हो गया), आइए, हम सब स्वर्ग की सीढ़ी खोजें (भाड़ में जाए बुदेलखंड) हमारे लिए दिल्ली ही देश का आदि है देश का अंत है...(पोर्ट ब्लेयर और सिक्किम की खबरें कौन पढ़ेगा भला) आप सब गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए।

देखिए साहब, गणतंत्र में असली माल तो तंत्र के पास है, गण तो महज छिलका है...उसके हाथ में तो बाबा जी का ठूल्लू है।

4 comments:

Dharm said...

विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र की ज़मीनी सच्चाई।
मंजीत भाई,सदैव के समान अदभुत कटाक्ष |
और हाँ, अगर आप कटाक्ष करते हुए अभी तक थके नहीं हो तो आप भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए | ;)

shivkumar mittal said...

Manjit g,jinhone ne azadi ke liye tyag kiya,balidan diya ab unhen bhula diya gayahai.Neta g ke din par Central Hall mein kewal ek neta pahuncha.Un ke balidanon ka phal khane giddh aur un ki auladein janta ke naam per hi janta ko loot rahi hain aur janta hai ki lut pit kar bhi uf nahin karti.Lutne ki aadat ho gayi hai.Nayenaye gidh paida ho rahe hain.Kaise uddhar hoga desh ka?

Shivangi Thakur said...

क्या हुआ जो भारत के गावों में भुखमरी है! फ़िक्र है, तो मैकडोनाल्ड के 75 के कॉम्बो पैक की ! लोग कुपोषण के शिकार हो, पर यहाँ तो वजन घटाने की होड़ लगी है ! गणतंत्र दिवस की यहाँ किसे पड़ी है मंजीत जी ! लोगो के मिजाज तो रविवार की छुट्टी ख़राब होने से बिगड़े है !

प्रवीण पाण्डेय said...

यही लगते रहना कि यह हमारा तन्त्र है, यही उनकी सफलता है।