Friday, September 19, 2014

बंगाल डायरीः दुर्गा पूजा, तापस पाल और बंगाल

कुछ दिनों बाद दुर्गा पूजा शुरू होगी। और कुछ दिन पहले तृणमूल नेता तापस पाल के बयान मीडिया में खूब सुर्खियां बटोर रहे थे। बंगाल आम तौर पर बहुत पढ़ा-लिखा और जागरूक सूबा माना जाता है। परिवार में भी महिलाओं की स्थिति ठीक मानी जा सकती है। लेकिन परिवार में रूतबा, समाज में भी वही रूतबा नहीं दिला सकता।

चुनाव कवरेज के दौरान बंगाल में घूम रहा था तो बांकुरा जाने का मौका भी मिला था। वीरभूम जिला। सुबलपुर गांव। लव जिहाद जैसा एक मामला सामने आया। एक जनजातीय लड़की को समुदाय के बाहर के लड़के से प्यार हो गया। 

सालिशी सभा यानी जनजातीय पंचायत, जिसे सुविधा के लिए आप इलाके की खाप पंचायत मान सकते है, ने उस आदिवासी लड़की पर पचास हजार रूपये का जुर्माना ठोंक दिया। लड़की गरीब थी, जुर्माना नहीं दे सकी तो सालिशी सभा के मुखिया के आदेश पर, बारह लोगों ने उस लड़की के साथ बलात्कार किया। बलात्कार करने वालों में मुखिया महोदय भी थे।

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी न जाने कितने तर्क देती हैं, लेकिन विधि-व्यवस्था पर उनकी पकड़ बदतर है। जरा गिनिएगा, फरवरी 2012 में पार्क स्ट्रीट रेप कांड, वर्धमान में कटवा रेप कांड, दिसंबर 2012 में उत्तरी 24 परगना में बारासात में सामूहिक बलात्कार, जुलाई 2013 मुर्शिदाबाद के रानी नगर में शारीरिक रूप से अशक्त लड़की का रेप, आरोपी था तृणमूल का नेता-पुत्र, अक्तूबर 2013 में  उत्तरी 24 परगना में मध्यमग्राम में एक नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार, लड़की का परिवार डर कर मकान बदल लेता है, अपराधी वहां भी उसका पीछा करते हैं। जनवरी 2014 में दक्षिणी कोलकाता के फिटनेस सेंटर की कर्मचारी को ट्रक में अगवा कर लिया जाता है और 5 लोग उसके साथ रेप करते हैं। जून 2014 में कामदुनी में कॉलेज छात्रा का रेप कर उसकी हत्या कर दी जाती है। मुखालफत पर उतरी महिलाओं को ममता बनर्जी माओवादी बता देती हैं।

यह उन बलात्कारों की सूची है जो मीडिया की नजर में आए, और मीडिया के जरिए लोगों की निगाह-ज़बान पर चढे। नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े पश्चिम बंगाल में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों की तरफ इशारा करते हैं।
साल 2006--1731
साल 2007--2106
साल 2008--2263
साल 2009--2336
साल 2010--2311
साल 2011--2263

महिलाओं के प्रति अपराधों में पश्चिम बंगाल देश में पहले स्थान पर है। बलात्कार के मामलों में तीसरे पायदान पर है। महिलाओं के प्रति अपराधों के लिए बदनाम शहरो में कोलकाता तीसरे नंबर पर है।

पूरे पश्चिम बंगाल में देश का आबादी का साढे सात फीसद हिस्सा रहता है, लेकिन महिलाओं के प्रति अपराध में यह 12.2 फीसद हिस्सा बंटाता है।

यह सवाल जब कुछ बुद्धिजीवी महिलाओं, मिसाल के तौर पर शांति निकेतन की एक प्राध्यापिका, और कोलकाता में एक महिला पत्रकार से किए गए तो दोनों ने यही उत्तर दिया कि आखिर अपराध किस सूबे में नहीं होते। 

तापस पाल हों या शांति निकेतन की शिक्षिका...उनके लिए दुर्गा पूजा के दौरान भी राजनीतिक प्रतिबद्धता अव्वल नंबर पर है।

2 comments:

Avinash Kumar said...

अच्छी जानकारी। थोड़ा लंबा पढ़ने की इच्छा थी

richa srivastava said...

बड़ी दुर्भाग्य पूर्ण विडंबना है कि देवी और कन्या पूजन वाले प्रदेश में महिलाओं की ये दुर्दशा है। एक तरफ ममता बनर्जी की तानाशाही प्रवृत्ति इन अपराधों पर पर्दा डालने की है,,वहीँ मीडिया का ध्यान अधिकाँश यू पी और दिल्ली तक सीमित हो कर रह गया है। बेहद सटीक विवरण !! बधाई!