Friday, February 6, 2009

बिहार यात्रा से लौटकर

कई दिनों से बल्कि महीने भर से अपने ब्लॉग को वक्त नहीं दे पा रहा हूं। पेट ने दिल और दिमाग़ पर कब्ज़ा कर लिया है। बहरहाल, कवरेज के सिलसिले में जब बॉस ने गरीब रथ से कहीं जाने को कहा तो मेरा पहला और आखिरी विकल्प जयनगर गरीब रथ ही रहा।

मेरी इस यात्रा की शुरुआत कुछ बेहतर नहीं कही जा सकती। कैमरामैन बिहार जाने के नाम पर बिदक रहा था (हालांकि वह खुद उड़ीसा का है) उसे किसी न कहा था कि बिहार की सीमा में घुसते ही एक गोली आएगी और सीधे उसेक भेजे को भेदती अनंत में विलीन हो जाएगी। लेकिन सरकारी आदेश के सामने उस अदने कैमरामैन की क्या बिसात.. उसे जाना पड़ा, जाना ही था।

गरीब रथ में कायदे से कोई गरीब दिखा नहीं, तो हमें निराशा होने लगी। ( ब्लॉग लेखन कर रहा हूं तो भाई निशांत सौरभ की तरफ से त्वरित टिप्पणी आई है कि गरीब रथ गरीबों की कमाई से खींचा जाने वाला रथ है, दुहाई हो) बहरहाल, पूरी बोगी में और मुमकिन है कि पूरी गाड़ी में सबसे ज्यादा गरीब हम लोग ही थे। लैप टॉप को लैप पर बिछाए आईटीकुशल युवा और चमक-दमक साडियों में सजी सामंती महिलाएं..दो-एक लड़कियां। पुरानी आदत है कि ट्रेन में चढ़ने से पहले रिज़रवेशन चार्ट देखता हूं और उसमें अपनी सीट के अगल-बगल १८ से २८ के रेंज की लड़कियों की तलाश करता हूं। ( महिला विमर्श के झंडाबरदारो से क्षमायाचना सहित)

परंपरागत रुप से मैंने इस बार भी किया, लेकिन बात जमी नहीं। लगा कि यह यात्रा बोर होने वाली है। लेकिन जैसे ही गाड़ी ने निज़ामुद्दीन स्टेशन छोड़ा, कैमरामैन को मैंने बताया कि बिहार के बारे में उसकी सोच भ्रामक है। बिहार बिहार है। बिहार अफगानिस्तान नहीं है, बिहार मुंबई भी नहीं है। और मेरे जैसा शराफत का पुतला भी इसी बिहार की देन है। तब जाकर हमारे कैमरामैन पांडा साहब थोड़े संतुष्ट हुए।
गरीब रथ के बारे में हमने अपने सहयात्रियों से बातचीत की।

राजनीतिक शिगूफे के तौर पर गरीब रथ को चाहें जितना गरिया लें, लेकिन ज्यादातर लोग इस बात से वाकिफ हैं और गरीब रथ को लेकर ज्यादा इंप्रैस नहीं हुए हैं। कुछेक सच्चे अर्थों में लाभान्वित लोग, दिल्ली में सड़क बनाने के काम में लगे कामगार.. पहली बार गांव जा रहे थे, पहली बार एसी में चढ़े भी थे। उनमें से एक हरलाखी जी ने बताया कि वह नेपाल सीमा से सटे गांव उनगांव जा रहे हैं और जीवन में पहली बार गांठ से खर्च करके एसी का सफर कर रहे हैं गोकि उऌकी पत्नी की बड़ी तमन्ना थी कि वह एसी में सफर करें। बहरहाल, हरलाखी और उनकी पत्नी के चेहरे पर खुशी के आलेख में आसानी से पढ़ गया.

एक परेशानी लोगों को इस ‍ट्रेन में पैंट्री कार की कमी को लेकर थी। लोग खाना खरीदने के लिए भी मार किए हुए थे।

अगली सुबह तकरीबन नौ बजे जब नींद खुली तो ट्रेन खड़ी थी। दोनों तरफ हरियाली..। असीम..अनंत। पांडा जी ने बताया कि अभी-अभी कोई नदी पार हुई है। देखा हॉल्ट था, राजेंद्र पुल..मैंने बताया कि गंगा को पार कर हम उसके ही किनारे खड़े हैं। पांडा जी फौरन से पहले गगा माई को प्रणाम किया.। गंगा की ओर से आते ठंडी बयार से उनके पुराने खयाल धुलने लगे। कहने लगे, बिहार में यह सब भी है। मुझे मुस्कुराना पड़ा। उनका कहना था कि बिहार के बारे में उनकी यह राय फिल्म मृत्यदंड देखने के बाद बनी थी।

गाड़ी लेट हो चुकी थी। दोनों तरफ की हरियाली को ताकते हुए हम मूंगफली जैसे टाइम पास का सहारा ले रहे थे। वहां से गाड़ी की असली रंगत दिखनी शुरु हई और जयनगर पहुंचते पहुंचते शाम के पांच बज गए। शाम हो ही गई थी, सड़क पर हर ओर सरस्वती पूजा के अगले दिन होने की वजह से विसर्जन की धूम थी।

7 comments:

कुमार आलोक said...

चाहे जो कुछ भी हो गरीब रथ के आने के बाद हरलाखी भी एसी का लुत्फ उठा रहा है ।नीतिश ने बिहार को संपूर्ण क्रांति दिया तो लालू ने गरीब रथ ..वैसे लालू जी को गरीब शब्द से अगाध प्यार है ..गरीबों से कितना है इसका पता लोकसभा में बिहार में राजद के प्रदर्शन पर टिका होगा ।

Udan Tashtari said...

हरलाखी और उसकी पत्नि के चहरे पर आये भाव को आभास कर मैं भी घर बैथे ही प्रफुल्लित हो गया. गरीब रथ का होना बस सार्थक हुआ.

बहुत रोचक वृतांत चल रहा है भाई..वैसे १८ -२८ बड़ी लम्बी रेन्ज धरे हो. :) बस, जरा मजाक कर रहा हूँ.

जारी रहिये.

राज भाटिय़ा said...

्चलिये अब गरीब बेचारे भी ऎसी मै यात्रा कर सकते है.
धन्यवाद

यती said...

बिहार अफगानिस्तान नहीं है, बिहार मुंबई भी नहीं है। iska matlab kya hai ????? aapne mumbai or afganistan ko compare kiya ????? if yes than aap KAMINE ho n if no dan aap BHJEJA KAAM PANI HO.... pls iska spashtikaran dijiye tat is
1) bihar afganistan q nai hai
2) bihar mumbai q nai hai

meri hindi achi nai hai aap k blog k wajahase thodi bahut hindi aati hai lekin in dono ka matlab plz samjayee .. meherbani hogi

गुस्ताख़ said...

जनकपुर तक- वाया जयनगर

मेरे प्रिय पाठक यती साहब, आपकी गाली सिर-माथे, कमीना हो सकता हूं और ये मेरा अपना ब्लॉग है यहां किसी किस्म के स्पष्टीकरण देने के लिए मैं बाध्य नहीं हूं। लेकिन अभी भी अपनी उस बात पर अडिग हूं कि बिहार अफ़गानिस्तान नहीं है। कारण- बिहार में बेवजह की अब ऐसी कोई तालिबानी हिंसा नहीं होती जो सांप्रदायिक पब कल्चर के विरोध के नाम पर देश के दूसरे हिस्सों में फैला रहे हैं। दूसरे किस्म के अपराध यहां भी हैं और जगहों पर भी हैं. बिहार इसी दुनिया का हिस्सा है कोई शिव के त्रिशूल पर नहीं बसा। दूसरे बिहार मुंबई इसलिए नहीं है कि यहां कोई भाई माफिया या गुंडा बाहर के लोगों को तंग करता हो। या महज परीक्षा देने आने पर मारपीट करता हो। ये तुलना आपके मराठीपने को चुनौती देने के लिए नहीं की गई थी। फिर भी एक मराठी के तौर पर आपकी भावनाएं आहत हुई हों तो हमें माफी मांग लेनी चाहिए।
सादर

यती said...

kamina ho sakta hu nai aap kamine ho or yeh baat ise reply ne prove kiya hai k aap 100% kamine ho ... bhenchot iska matlab tune mumbai or afganistan ko compare kiya... or ek baat bato ise mai marathi wala muda kaha se aaya ??? sale tune bihar maharastra ko compare kar ke apni aoukada dikha di ….point is not wat is bihar or maharastra its question of our country … sale teri soch hi bhenchot giri ki hai….. tumari jankari k liye batati hu ki mai 100% goan hu born n brought up in goa n goa is not part of maharashtra samje ??? hindustan k kis ek jagaha ko afganistan jaise jagaha k sath compare karna chutiya giri kehte hai... tune gar bihar ko b afganistan k sath compare kiya hota na to sale tuje yahi galiya milne wali thi...kisi insan ko, kisi jagaha ko ,ya fir kisi chij ki pehchan comparision se hoti hai ?? bihar mumbai ya bihar afganistan ki jagaha tum apne cameraperson ko bata sakte they k Biharis r heart of ganga mata u know basterd u biharis got a golden history u cud hav told tat biharis played a significant role in all the three stages of national struggle- Moderate, Militant and Gandhian phase
2.Bihar was one of the important centers of the 1857 movements, which was a national challenge to the growing supremacy of the East India Company.
3.most of the heros of 1857 r from Bihar
4.on 26/11 also biharis played important role
... THIS IS IDENTITY OF OUR BIHAR n not BIHAR MUMBAI NAI HAI BIHAR AFGANISTAN NAI HAI ... abe thakur these r few points im mentioning sale tu Delhi se Bihar tak apne cameraperson ko hamare Bihar k baremai bohot kuch bata sakte they lekin SALE TU ULTA DIPLOMATE BANKE USE BOLTA HAI KI BHIHAR AFGANISTAN OR MUMBAI NAI HAI Y D HELL U NEED COMPARISION MAN ??? ... U BASTERD DONT PLAY POLITICS WID ME BY SAYING "MARATHI PAN KO CHUNAOUTI " WE RESPECT MAHARSHTRA COZ MAHARSHTRA GAVE US SHIVAJI N NOT RAJ THAKRE WE R PROUD OF MUMBAI COZ MUMBAI THOUGHT US WAT IS LIFE AND STRUGELING N WE REPECT BIHAR COZ WE GOT EMPEROR LIKE ASHOKA N WE ALSO RESPECT BIHAR COZ WE GOT A POLITICAL THINKER ECONOMIST AND A KING MAKER " CHANAKYA " N HIS ARTHASHASTRA

u said mumbaikars got mafiya N gundas than mr u people got NAXALWADIS called NITISH LALU n PASWAN jo bina mirpit kiye apne hi logoan ko janma bhumi chodne k liye majboor karte hai ... n let me tell u one more thing not a single mumbaikar will leave his birth place for a reason like bombsoft,mafiyas or wat u call as gundaisam coz we know how to face such tiny situation. just think if same thing will happen in bihar.. u people r leaving ur place coz ur not getting do waqt ki roti ...... DON’T DARE TO INSULT NY PART OF MY COUNTRY HEREAFTER SALE JAHA KAHI PAR BHI HOGA NA SALE WAHI PE THOK DUNGI…. OR BHAGVAN NE DIMAG KHANE K LIYE OR KISI KI GAND MARKE BACHE PAIDA KARNE K LIYE NAI DIYA HAI USEE POSITIVELY ISTAMAL KARO ….

SUSHIL said...

Aapane Yati ji ki gali aapane khud ke sar par le li aur maan bhi li isase ye pratit hota hain ki aap bhi ise mehsus karate ho jo aap ho (Kamine)

Ye bhale aapaka khud ka blog ho par use padhane wale sarwa jati dharma ke log hain kyunki ye ek public blog hain.

Spashtikaran tabhi de sakate ho jabhi aap yeh baat spashta kar sakate ho ( Jo aap nahi kar sakate).

Bihar afaganisthan nahi hain aaise likhane se aapane aapake rajya ko kisi se compare karana chaha jisase aapake rajya ki manhani hui hain.

Mumbai ki aapani ek alag pehachan hain isame bhai aur mafia don bhi hain par phir bhi bihar ke patana main IPC crime rate 445.0 crimes hain toh Mumbai main 179.9 hain. Jisase ye pramanit hota hain ki Mumbai main crime percentage kam hain.

Aur main aapalo jyada kuch bolana nahi chahata kyunki main kisi bhi ek rajya ko dusare rajya se compare nahi karana chahata. Because we all know first we are indians.