Saturday, February 7, 2009

सरस्वती पूजा और सानिया मिर्जा कट नथुनिया


जयनगर स्टेशन उतर कर जब हम लोग होटल की तरफ चले, तो राह में ट्रकों पर सरस्वती जी की प्रतिमाएं थीं, और साथ में अजब-गज़ब गानों पर नाचते लड़के। बिहार में सानिया मिर्जा की लोकप्रियता की एक खास झलक भी दिखी। गाने बज़ रहे थे--सानिया मिर्जा कट नथुनिया में जान मारेलु...। तेज़ संगीत..। जितना तेज़ संगीत, उतना ही तेज़ नाच।


जो नाच रहे थे..उनमें से अधिकतर ऐसे थे जिन्हें पढाई के नाम परबुखार आ जाता होगा। लेकिन उस इलाके में सरस्वती पूजा बड़े जोर-शोर से होता है। चंदा मांगकर.. कई लोग चंदा लेकर बड़ी धूमःदाम से पूजा करते हैं। लेकिन एक दंश सालता है.. बिहार में साक्षरता का औसत देश में सबसे कम है, महिला साक्षरता की तो बात छोड़ ही दीजिए।


एक और गाना बहुत सुनाई दिया।... ताड़ी वाली ताड़ी पिला दे.. ताड़ वाला ज्यादा डालअ, खजूर वाला कम..तर्ज थी हरियाणवी गाने पाणी वाली पाणी पिला दे की। एक बार फिर लगा कि बिहार भी ग्लोबल जैसा कुछ हो रहा है। कम से कम हरियाणवी गाने की धुन सुनना अच्छा ही लगा। गाना चाहे जैसा था।( बिहार के संगीत से कम प्रेम नही मुझे भी लेकिन गाने के शब्द कुछ ऐसे थे कि कुछ खास बिहारीपना और कलाकारी थी नहीं उसमें, अतएव मुझे बिहार का मज़ाक बनाने वाला न माना जाए)


सरस्वती का आराधना का शोरगुल वाला ढंग अभी भी वैसा ही है, जैसा हमारे किशोरवय के दिनों में था। इन्ही विसर्जन की प्रक्रियाओं में भाई लोग अपनी 'उन' से भी मिल लेते हैं, नज़र भर कर देख लेते हैं, नाच कर रिझाने की कोशिश करते हैं, अच्छी बुरी हरकते करते हैं। देवी सरस्वती भी ज़रुर मुस्कुरा रही होंगी।


बहरहाल, पांडा साहब को हमने वादा किया था कि जयनगर की मशहूर मिठाई ज़रूर खिलाएँगे। मिथिला के लोग मिठाई के प्रेमी होते हैं.। उदरेस्थु मैथिलः यानी मैथिल अपने पेट या भोजनभट्टई के लिए मशहूर हैं। हमने मिथिला के रसगुल्ले पांडा को पेश किए।


लेकिन इस दौरान एक और सवाल जेह्न में घूमता रहा कि आखिर वो कौन सी चीज़ है, जिसने सानिया मिर्जा या उनकी नथुनिया को बिहार में इतना पॉप्युलर कर दिया है। जवाब...सोच रहा हूं।


अगली सुबह हमें जनकपुर जाना था.. नेपाल रेल्वे के ज़रिए.. उसका विवरण बाद में..

6 comments:

Kishore Choudhary said...

आपकी ये गुस्ताखी तो दिल फरेब निकली

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

.जितना पैसा हमारे यहाँ हर साल मूर्तियों पर ख़र्च कर दिया जाता है और वह भी ग़रीब जनता का ख़ुद ग़रीब जनता द्वारा, अगर उसे इकट्ठा कर के को-ऑपरेटिव तौर पर कोई उद्योग लगाएं तो देश की बेकारी की आधी समस्या ख़त्म हो जाए.

राज भाटिय़ा said...

सानिया मिर्जा कट नथुनिया में जान मारेलु...

ताड़ी वाली ताड़ी पिला दे.. ताड़ वाला ज्यादा डालअ, खजूर वाला
अरे वाह सरस्वती जी की पुजा बिहार मै इन गीतो से की जाती है?
बहुत सुंदर, शायद मां सरस्वती भी यह सब देख कर सोचती तो जरुर होगी कि अब मेरी जरुरत इन सयानो को नही
धन्यवाद

शोभा said...

अच्छा लिखा है। ः)

विनय said...

आपका लेख पढ़कर प्रसन्नता हुई!
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गुलाबी कोंपलें,
चाँद, बादल और शाम

jayram said...

ye ek tarah ki adhkachri parampara ki shuruaat hai . ghar-pariwar mein mile sanskaro ka asar hai . saraswati puja ho ya durga puja wisarjan ke din bhonde giton par nachne -gane aur daru pine ka prachalan faile abhi 5-7 saal hi bite ... ! puja-paath , sraddha bhakti sab aaj maujmasti ka sadhan ban chuka hai. dilli ka akshardham ho ya sudur bihar ka koi mandir , ek piknik place ban chuka hai . premi-premikaon ka milansthal ban chuka hai ........
kul milakar ek badi samajik samasya hai ........