Monday, May 9, 2016

हेलिकॉप्टर घोटाला तो चिंदीचोरी है जनाब!

अच्छा, मेरे प्यारे पाठकों, आप तो अखबार पढ़ते ही होंगे। अखबार न पढ़ते हों, तो टीवी देखते ही होंगे क्योंकि यह एक ऐसा काम है जिसके बिना गुजारा नहीं अपने देश में। खबरों में चीख-चीखकर बताया जा रहा है कि देश के सबसे कुलीन व्यक्तियों के लिए पिछली सरकार ने हेलिकॉप्टर खरीदने का फरमान जारी किया था। अब हेलिकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया में घोटाला कर दिया गया।

अब सरकार के पास यह दस्तावेज़ हाथ लगे है कि इटली की खास कंपनी को ठेका देने के लिए हेलिकॉप्टर खरीद की जरूरी शर्तों, मसलन वह कितनी ऊंचाई तक उड़ सकता है, उसकी ऊंचाई कितनी होनी चाहिए, जैसी बातों में एक-एक करके छूट दी गई। फिर, खरीद के बाद कुछ ढाई सौ करोड़ रूपये की दलाली दी गई।

बताइए आप ही, नई बात है यह?

अब खरीद-फरोख्त के मामले में लोग दलाली नहीं खाएंगे तो क्या यज्ञ-हवन में खाएंगे? और दुनिया में बहुत सारे काम भविष्य सुरक्षित करने के लिए भी तो किए जाते हैं। कुछ लोग बचत करते हैं, कुछ बीमा करवाते हैं, कुछ अपने बेटे-बेटियों, नाती-पोतो के लिए घोटाले कर लेते हैं।

और सवाल भी कितनी रकम का? 3600 करोड़ रूपये के सौदे में महज 256 करोड़ रूपये?

यह तो सरासर नाइंसाफी है जनाब। इतने पैसे तो रेज़गारी के बराबर हैं। चिंदीचोरी जैसी बात है यह, और इस पर आप होहल्ला मचा रहे हैं। शराफत तो छू भी नहीं गई आपको! मधु कोड़ा को देखिए, उन पर 4000 करोड़ के घोटाले का आरोप है, लालू प्रसाद का चारा घोटाला तक 800 करोड़ का था।

ज़रा तुलना कीजिए। कुछ आंकड़े बता रहा हूं। आजादी के साठ बरस हुए अपने देश के, और तब से लेकर आज तक, भ्रष्टाचार की भेंट हुई रकम है, 462 बिलियन डॉलर। जी, यह रकम डॉलर में है। चूंकि हम हर बात पश्चिम से उधार लेते हैं, सो यह आंकड़ा भी उधर से ही है।

वॉशिंगटन की ग्लोबल फाइनेंसियल इंटीग्रेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, आजादी के बाद से ही भ्रष्टाचार भारत की जड़ों में रहा है, जिसकी वजह से 462 बिलियन डॉलर यानी 30 लाख 95 हजार चार सौ करोड़ रूपये भारत के आर्थिक विकास से जुड़ नहीं पाए।

तो भ्रष्टाचार और घूसखोरी की हमारी इस अमूल्य विरासत पर, जो हमारी थाती रही है, आप सवाल खड़े कर रहे हैं? देखिए, मायावती जी को, उन्होंने राज्यसभा में कहा कि सीबीआई से जांच कराइए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में। कांग्रेस के शासन में सीबीआई जांच में सुप्रीम कोर्ट की निगहबानी की जरूरत नहीं थी। पता नहीं क्यों बीजेपी के शासन में है।

जब भी मैं भ्रष्टाचार की अपने देश की शानदार परंपरा का जिक्र करता हूं, हमेशा मुझे नेहरू दौर के जीप घोटाले से लेकर मूंदड़ा घोटाले, इंदिरा के दौर में मारुति घोटाले से लेकर तेल घोटाले, राजीव गांधी के दौर में बोफोर्स, सेंट किट्स, पीवी नरसिंह राव के दौर में शेयर घोटाला, चीनी घोटाला, सांसद घूसकांड, मनमोहन के दौर में टूजी से लेकर कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला याद आता है। यह एक ऐसी फेहरिस्त है, जिसको इतिहास हमेशा संदर्भ की तरह याद रखेगा।

संयोग देखिए, राज्यसभा में जब, बुधवार को, हेलिकॉप्टर घोटाले पर चर्चा चल रही थी, उस वक्त आखिर में, विजय माल्या के इस्तीफे को मंजूर करने की घोषणा भी हुई। विजय नाम से याद आया, एक विजय था, जिसको ग्यारह मुल्कों की पुलिस खोज रही थी और दूसरा विजय है जिसको देश के बैंक प्रबंधक खोज रहे हैं।

बहरहाल, मेरा मानना है कि घोटालों पर संसद में चर्चा कराना टाइम खोटी करना है। आजादी के बाद से संसद में 322 घोटालों पर चर्चा हो चुकी है, नतीजा क्या निकला, मैं आज भी जान नहीं पाया हूं।

बड़ा ही दिलचस्प हो गया है मामला। किसने कितनी कमीशन खाई? क्या इसमें सोनिया गांधी का नाम है? राज्यसभा में बहस हो रही थी और सारे बुढाए खुर्राट नेता मौजूद थे। क्यों न रहें, मामला पैसे का था, क्यों न रहेंगे? कोई किसान आत्महत्या पर बहस हो रही थी क्या, कि उनके आने-न-आने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

यकीन मानिए, कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इस देश में 400 लोगों के पास चार्टड विमान हैं, 2985 परिवार अरबपति से भी अधिक हैं, देश के किसानों पर ढाई हज़ार करोड़ का कर्ज है और वह आत्महत्या करते हैं तो देश के 6 हजार उद्योगपतियों ने सवा लाख करोड़ का कर्ज ले रखा है। उनमें से कोई आत्महत्या नहीं करता।

पाठकों, घोटाले हुए हैं। यकीनन हुए हैं। इटली की अदालत में साबित हुआ है कि घूस दिया गया है। यह पता नहीं है कि लिया किसने है? और पता चल भी जाए तो क्या होगा? एक मिसाल भर देना चाहता हूं, बिहार नाम के राज्य में लालू चारा घोटाले में दोषी साबित हुए। जेल गए। चुनाव नहीं लड़ सकते। लेकिन उनका बेटा राज्य का उप-मुख्यमंत्री है और वह खुद किंगमेकर।

संविधान और न्यायपालिका पर भरोसा रखिए। बाकी जो है सो तो हइए है।

मंजीत ठाकुर

2 comments:

विकास नैनवाल said...

ये घोटाला तो है। इस घोटाले के कारण भाजपा ने अपने एक विरोधी को तो पस्त कर ही दिया है। भले ही साबित कुछ न हो लेकिन आने वाले चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी पलीत करने के लिये एक मुद्दा तो मिल ही गया है। हाँ, वैसे उम्मीद तो कम है (रोबर्ट वाड्रा को भी घेरने वाली थी भाजपा चुनाव के बाद) लेकिन देखना बनता है कि इस मुद्दे में भी सियासी रोटियाँ सिकेंगी या कुछ निर्णय भी आएगा।

Mooshak सन्देशवाहक said...

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निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

बात मात्र लिख भर लेने की नहीं है, बात है हिन्दी की आवाज़ सुनाई पड़ने की ।
आ गया है #भारतमेंनिर्मित #मूषक – इन्टरनेट पर हिंदी का अपना मंच ।
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