जगदम्ब अहीं अवलम्ब हमर,
हे माए अहाँ बिनु आस केकर।
हे माए अहाँ बिनु आस केकर,
हे माए अहाँ बिनु आस केकर।
हे माए अहाँ बिनु आस केकर,
हे माए अहाँ बिनु आस केकर।
जँ माए अहाँ दुःख नै सुनबय,
तऽ जाय कहु ककरा कहबय।
करू माफ़ जननी अपराध हमर,
हे माए अहाँ बिनु आस केकर।
तऽ जाय कहु ककरा कहबय।
करू माफ़ जननी अपराध हमर,
हे माए अहाँ बिनु आस केकर।
जय माता दी! जय जगदंबे!
“जगदंब अहिं अवलंब हमर” माँ दुर्गा के चरणों में समर्पित एक भावपूर्ण स्तुति है। इसमें माँ जगदंबा को अपना सहारा मानते हुए उनके प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का भाव व्यक्त किया गया है।
मैथिली और हिंदी में गाई गई यह भक्तिमय प्रस्तुति माँ दुर्गा के भक्तों के लिए प्रेम, आस्था और आध्यात्मिक शांति का अनुभव है।
माँ जगदंबा सब पर अपनी कृपा बनाए रखें।
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जय माँ दुर्गा! जय जगदंबे!
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