Monday, January 14, 2008

एक ठो भारत रत्न हमको भी..

आजकल भारत रत्न को लेकर देश भर में मोल-तोल हो रहा है। पहले आडवाणी जी ने अपने प्रबल प्रतिद्वंद्वी को भारत रत्न देकर शंटिंग में डालने का अभियान चलाया। फिर माया ने कहा सवर्ण-मनुवादी नेता को मिले तो कांशी राम को क्यों नहीं? वामपंथियों ने कहा इतिहास में बर्बर कृत्य के लिए जिम्मेदार भाजपाई कहीं इस रत्न को न ले उड़े.. तो यह रत्न उनके ऐतिहासिक भूल करने वाले नेता ज्योति बसु को ही मिलना चाहिए। इस बार सही टाइमिंग से रत्न मांग लो वरना पता चला कि ऐरे-गेरे को मिल जाए तो दुबारा ऐतिहासिक भूल हो जाए।

फिर मांगने वालों ने चौधरी चरण सिंह और बहादुर शाह जफ़र तक के लिए रत्न मांग डाला है। हम तो कहते हैं जफ़र ही क्यों अकबर समेत हर मुगल बादशाह को, भारत रत्न दो। मुस्लिम वोट बैंक पक्का। हर्षवर्धन और समुद्रगुप्त को दे दो, हिंदू खुश। जमशेद जी टाटा को दो, पारसी खुश। गुरु नानक, साईं बाबा, अमीर खुसरो.... लिस्ट तो अंतहीन है। क्योंकि हमारा देश महापुरुषों का देश है,ऐसी मान्यता है।

कल हिंदुस्तान अखबार में सुधीश पचौरी ने भी मांग लिया है। तो हम क्या सौतेले हैं? हम भी भारत के ही नागरिक हैं। ऐसा करों हमको भी दे ही डालों। हमारा योगदान मत पूछो। करीबी दोस्त कहते हैं कि ऊंगली करने में हम वामपंथियों से भी आगे हैं। तो भारत रत्न तो इस आधार पर हमको भी मिलना ही चाहिए ना।

देखो ना देखो.. चश्मे के साथ हम कितने बडे बौद्धिक नज़र आते हैं। हाथ को गाल पर थामे.. लगता है कि जेपी की तरह कोई संपूर्ण क्रांति की बात सोच रहे हैं। ऐसा नहीं लगता कि सारी दुनिया का बोझ हमारे ही कपार पर है? हमारी आंखों में आपको सारी दुनिया की चिंता नज़र नही आती? तो दुनिया के लिए चिंतित मेरे जैसी शख्सियत के लिए भारत रत्न तो क्या शांति और साहित्य का नोबेल भी कम है।

आप सब हर चैनल को एसएमएस करके बताएं कि यह जो गुस्ताख है, यह भारत रत्न पाने का सही बंदा है। रत्न-वित्न चाहे जितने बांट लो, गोटी लाल करते जाओ, लेकिन एक ठो रत्न इधर भी फेंक देने में क्या घट जाएगा?

3 comments:

विकास सारथी said...

मंजीत जी, अगर ऊंगली करने के क्षेत्र में कोई नोबेल होता तो अब तक सारे आप ही के नाम होता, लेकिन भारत रत्न मुश्किल है क्योंकि वहां नोबेल से भी ज्यादा सेटिंग की जरुरत है।

अभय तिवारी said...

शानदार.. भई हमारा वोट आप को!

chavanni said...

रत्न का यत्न करें.