Sunday, October 7, 2007

पाकिस्तानी लोकतंत्र के लड्डू

पाकिस्तान को नया राष्ट्रपति मिलने वाला है। राष्ट्रपति कितना नया होगा, वर्दी में होगा..( सेना की वर्दी जनाब, अपने दिमागड का कूड़ेदान न खोले कृपया) या बिना वर्दी का, इस सवाल का जवाब उतना ही साफ है, जितना बीजेपी का राम मुद्दा। भारत के लोग, भारत की मीडिया और भारत के नेता... एक साथ गला फाड़ कर चिल्लाते हैं, अमेरिका के सामने साबित करने पर तुले रहते हैं. देखिए मालिक... हम सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। अबे..क्या खाक लोकतंत्र हैं? आपको चुनाव के ठीक बाद पता होता है कि किस उम्मीदवार को कितने फीसद वोट मिले हैं? नहीं पता ना....। अजी नज़रें पश्चिम पर रखने वालों बुद्धिमानों, देखों पाकिस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त को वोटिंग के ठीक बाद पता चल गया कि जनाब मुशर्रफ को सबसे ज़्यादा वोट मिलें हैं। जीतने वाले वही हैं। आपके माननीय चुनाव आयुक्त कैसे हैं... एक्जिट पोल करने तक पर गोपनीयता का पहरा बिठा रखा है। चैनलों को मनाही है। नहीं दिखा सकते। दिखाया तो कारण बताओ नोटिस जारी हो जाएगा। वैसे एक बात और .. कुछ बेकार के चैनलों को छोड़कर किसी को एक्जिट पोल दिखाने का वक्त भी नहीं। अरे यार, देखते नहीं रोज़ाना पब्लिक सड़क पर उतर रही है... हमें राखी सावंत को देखना है, राखी का इंटरव्यू हंसते हुए पत्रकार के साथ आए तो स्क्राल हटाओ. हमें देखने लायक और नहीं देखने लायक हर चीज़ देखने दो। बहरहाल, बात लोकतंत्र की हो रही थी। हमारे यहां लोकतंत्र बुढा गया है। साठ साल का हो गया है। सठिया रहा है यह। इसे सही राह पर ले जाने के लिए वाइग्रा की ज़रूरत है। कर्नाटकी नाटक देखिए.. वाइग्रा खाकर हमारा लोकतंत्र यौनाचार के नए आसन आजमा रहा है। पाकिस्तान में लोकतंत्र ओढ़ा जा रहा है, हम जन्मजात लोकतंत्र की चुसनी के साथ पैदा हुए हैं, उसे ही चुभला रहे हैं। टीवी चैनलों, एफएम चैनलों पर पाबंदियों के साथ हम अपने गणराज्य को वाइग्रा खिला रहे हैं...पाकिस्तान में अवाम बदल-बदलकर रस लेती है। कभी तानाशाही, कभी मूर्ख सियासयदां, जिनका अपनी ही फौज और अवाम पर कंट्रोल नहीं..कभी कभी लोकतंत्र की नौटंकी भी।हम ऐसे है कि विविधता से भरे हैं। केसरिया भारत अलग. हरा हिंदोस्तां अलग ..सफेद तो खैर अलग है ही...। हमारी जनता को भी कोई चूतिया नहीं बना सकता सिर्फ नेता उनकी जात का, तो फिर अवाम यह नहीं देखती कि चुना जाने वाला नेता किस पार्टी का है, उसकी पृष्ठभूमि क्या है। हमारे लोकतंत्र का फलक बेहद बड़ा है.. उनकी तरह नहीं। आमीन

2 comments:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

: गुस्ताख़.. saab,
maza aaya yahan aakar....
bahut saree bataen aap yahan aalag dangh se kah rahe hain.
mazedar hai...

atul said...

manjeet ji aapne jo pakistan k loktantra ki paribhasa di hai apne blog k mmadhyam se wo bilkul sahi haimai aapki baat se puri tarah sahmat hoo