Tuesday, October 9, 2007

कौन देशभक्त, कौन देशद्रोही...

लो जी लो... कर लो फैसला। कौन है देशभक्त और कौन देशद्रोही... महर्षि मार्क्स के चेले चपाटी कह रह हैं, अमेरिका से एटमी करार करने वाले देशद्रोही हैं। मयडम जी फरमा रही हैं, करार पर तकरार करने वाले देश के विरोधी हैं। गुरु हम तो नरभसा गए हैं। हम तो आज तक तय ही नहीं कर पाए कि हम एटमी करार के पक्ष में हैं या विपक्ष में। अमेरिका के साथ करार हो जाएगा, तो यकीन मानिए भारत के हर नागरिक को बिना लिंगभेद, बिना जाति भेद और बिना किसी अन्य भेदभाव के रोज़गार मिल जाएगा। रोटी, कपड़ा और मकान की समस्या हल हो जाएगी। दिल्ली की सड़कों पर ब्लू लाईन बसें तांडव नहीं मचाएंगी। हर पत्रकार के लिए एक प्लैट अलॉट किया जाएगा... हम्म।लेकिन ज़रा देशभक्त लोगों के बारे में, उनके अतीत के बारे में पढ़ता हूं तो दिमाग़ का शक्की कीड़ा कुलबुलाने लगता है। १९६२ में इन्होंने ही चीन के साथ जाने या फिर उसे नैतिक समर्थन देने की बात की थी ना। कहीं ऐसा तो नहीं कि चीन के ही सपोर्ट पर गुरुघंटाल लोग फिर समर्थन वापसी(?) का वितंडा खड़ा कर रहे हों? और समर्थन वापसी.. हिम्मत है क्या? अरे वापस लेना होता तो इंतज़ार किस बात का? जियांग जेमिन ने हरी झंडी नहीं दी है क्या? चलो मान लेते हैं कि करार गलत है, लेकिन इतने दिनों का इंतजार किस लिए? वोट पाकर मदमस्त हुए वामपंथियों .. जनता के बीच क्या कह कर जाओगे? सरकार किस लिए गिराई? प्याज मंहगे होने लगे हैं उस मुद्दे पर? राम सेतु पर संप्रदायवादियों के खिलाफ? गरीबों के कितने हितकारी-शुभाकांक्षी हो, नंदी ग्राम में देख चुका है पूरा भारत। कम्युनिस्ट हो, तो उसे जीवन में उतारकर दिखाओ यारों। बोतलबंद पानी पीकर, रीड एंड टेलर के सूट मेंसज कर किस विचारधारा (जो भी है, उधर की ही है) को फॉलो कर रहे हो, उसकी कलई खुल रही है। माफ करना महर्षि मार्क्स आपके चेले चपाटी आपके ही विरोध में हैं। अपने अनुयायियों से कहो आपके नाम की रोटी सेंकना बंद करें। आपके सच्चे चेले तो किसी बेर सराय में पागल कहे जाक अभिशप्त जीवन जीने को बाध्य हैं। (देखे राजीव की क़िस्सागोई)वैसे बिना ज़िम्मेदारी के सत्ता सुख पाने वाले काहिल वामपंथी नेताओं आपका अच्छा वक्त खत्म होता अब..।

यारों कोई कहे उनसे कि करार के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होने वाला आदमी द्रोही या भक्त नहीं है देश का। वह तो खालिस राजनेता हैं। देशभक्त तो सरहद पर शहीद होने वाले जवान हैं, संसद पर हमले के वक्त जान देने वाले सिपाही। ईमानदारी से देश के लिए सपने देखने और उसे साकार करने वाला हर कोई... डॉक्टर, इंजीनियर, सॉफ्टवे.यर प्रफेशनल, पत्रकार,...ट्रेन सही वक्त पर ले आने वाला ड्राईवर.. हर इंसान जो देश के सोचता है। ....

5 comments:

गिरीन्द्र नाथ झा said...

Guru ko salam.
aachaa laga aap ko yahan dekh kar..
ye aalag baat hai ki aap ke blog pe pahli baar aaya hun.
lekin jahan tak yaad hai ..mujhe to humari bhent hui hai..
bhale hi aap bhul gye....yaad karen....GAlib ke prog me humari bhent town hall me hui thi.......
yaad aaya...

गुस्ताख़ said...

ahaa yaad aa gaya,
thanx a lot.. girindra jee. aate rahiye aapka blog shandar hai.

sanjeev said...

Respected ,Manjeet Bhaiya
That was really really marvellous,the way you tried to fathom their(Red Party) weaknesess and hollow promises …but one thing I would like to say here, may be I m wrong ,neither left nor right has done anything good for this country .Left has done nothing right and Right has no plan left with them.
Keep writing

sanjeev said...

Respected ,Manjeet Bhaiya
That was really really marvellous,the way you tried to fathom their(Red Party) weaknesses and hollow promises …but one thing I would like to say here, may be I m wrong ,neither left nor right has done anything good for this country .Left has done nothing right and Right has no plan left with them.
Keep writing

गुस्ताख़ said...

khuda ka karishma hain ye
ya kismat ki inayat
lafzon ko sikhaya hain bolna unka naam
jinki tasveer hain in aakhon mein subah sham
dil se kartehain unhe hum dua salaam
bhejte hain unhe hum ye pehgam
"eh khuda teri khudai kya khub hain
unka naaam likha hain is ishk ke mehkhane mein
todh bandishon ko yaad kaarte haain unhe unke afsaane mey!!!!!!!!!!!!!