Monday, February 4, 2008

मुंबई की चौपड़ में बिहार-यूपीवाले


लो जी लो, बिहारियों और यूपी वाले भैयों को लेकर एक नया विवाद सामने आ ही गया।
मराठियों के स्वयंभू नेता राज ठाकरे ने उचारा कि - जब उन्हें (अमिताभ को) चुनाव लड़ना था तो वह इलाहाबाद चले गए. उन्होंने मुंबई से चुनाव क्यों नहीं लड़ा? यहाँ तक कि ब्रांड अंबेसडर बनने के लिए भी उन्होंने उत्तर प्रदेश को ही चुना। इसके साथ ही राज ने बिहार-यूपी वालों के छठ पूजा पर निशाना साधते हुए उसे नौटंकी बताया था। राज ठाकरे ने अब बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन पर उनके 'उत्तर प्रदेश प्रेम' को लेकर तीख़ी टिप्पणी की है.।

संसद में अगले लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत की उम्मीद कर रही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में रह रहे ग़ैर-मराठियों के ख़िलाफ़ पिछले कुछ समय से अभियान चला रखा है.। राज को लगता है कि इससे उनके दल को कुछ सीटें अधिक हासिल हो जाएंगी।

राज ठाकरे को लगा कि अमिताभ को महाराष्ट्र का ब्रांड एंबेसेडर बनना चाहिए था, यूपी का नहीं। अब उधर से जया आंटी का उत्तर आया कि हम सिर्फ बाल ठाकरे को जानते हैं। किसी और ठाकरे को नहीं।
गुस्ताख भी मानता है कि ठाकरे होने के नाम पर जो भी मशहूरी (अच्छी या बुरी ) मिली है वो सिर्फ बाल को मिली है। सिंहासन न मिलने से तिलमिलाए राज के लिए ये शिगूफा छोड़ना तो लाजिमी था। वरना उन्हें जानता कौन। कम से कम बिहारियों के मन में राज का नाम छप तो गया ही है। कहावत है न, बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?

खासकर चारों तरफ से घिरे अमिताभ पर हमला करके वह अमिताभ विरोधी पार्टियों की गुडबुक में आना चाहते हैं।

राज ठाकरे नकारात्मक प्रचार की इसी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। अब उनका कदम ऐसा प्रतीत होता है कि बिहारियों से समझौते का होगा। ताकि पहचान भी बन जाए, वोट भी मिल जाएं।

गैर मराठियों के लिए स्वर्ग के दरवाज़े खोल देने वाले राज ठाकरे ने भाषण में रेल मंत्री लालू प्रसाद की भी नकल की. बाला साहेब के सुयोग्य भतीजे ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद सिर्फ़ अपने समुदाय के लिए काम कर रहे हैं.। राज साहब नफरत फैलाकर राजनीति करने के लिए जिस ज़मीन की तलाश में आप लगे हैं ना, वह बहुत पोली है।

उधर, अमर सिंह भी मामले लपकने में तो माहिर हैं ही। अब उनके समर्थक यूपी में ट्रेन रोक रहे हैं। समाजवादी पार्टी मुद्दे को गरमाने की कोशिश में है। बसपा से मात खाए सपा के लिए इससे बढ़िया क्या मौका हो सकता है?

जिस तरह से राज के समर्थकों ने अमिताभ के घर पर बोतल फेंकी। टैक्सी वाले को पीटा, उसकी टैक्सी तोड़ दी। एक पोस्टर को आग लगा दिया। लेकिन सवाल यह है कि कुछ गुंडो के लेकर लफड़ा मचाने वाले इस लुच्चे को किसी ने रोका क्यों नहीं। गुस्ताख को तो डर है कि कहीं सारा मामला सपा- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का मिलीभगत न हो।

3 comments:

आलोक said...

हाँ सही है, मतलब एक फ़िल्म अभिनेता, जो कभी २० साल पहले कहीं से चुनाव लड़ा था, अब एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है।

आलोक

Mired Mirage said...

मुझे तो आश्चर्य होता है कि क्या कुछ लोग हर समय लड़ने भिड़ने, तोड़ फोड़ करने के मुद्दे ढूँढने का ही पूर्णकालीन काम करते हैं । मुम्बई में बाहर के प्रान्तों से आई पूँजी भी हटाना चाहेंगे क्या राज जी ?
घुघूती बासूती

yati lad said...

manjit ji tumhi yha velis communal vaglat tumhi uttar bharitiya ,jey aahe te swikarat nahit. raj thakre ne kelay te agdi barobar aahe itki varsha je shiv sena karu shakli nahi te raj thakre ne karun dakhavla.jar sarkarchya ***** dam asta tar tyana itkyat aatak keli asti
MAHARASHTRA tayla pratek mansane MARATHI dharma swikarla pahije "jasa desh tasa vesh"
संसद में अगले लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत की उम्मीद कर रही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में रह रहे ग़ैर-मराठियों के ख़िलाफ़ पिछले कुछ समय से अभियान चला रखा है.। राज को लगता है कि इससे उनके दल को कुछ सीटें अधिक हासिल हो जाएंगी।
aasa hi tumhi mhanalat mi mhane ki ka ru nayee jara MARATHI dharma vachvayacha aasel tar he have to b communal and political
yevdach sangen ki aamhi tarun pidhi raj thakre barobar aahe

JAI MAHARASHTRA JAI GOMANTAK