Tuesday, May 20, 2008

एफटीआईआई के दिन-३


एफटीआईआई में पहले ही दिन से मन रमने लगा था। गरमी तेज़ तो थी लेकिन दोस्तों ने अहाते के ही 'शांताराम पॉन्ड' जैसी जगह से परिचित करवा दिया था। यह तालाबनुमा गड्ढा वी शांताराम के नाम पर है। इसी जगह पर 'संत तुकाराम' की शूंटिंग भी हुई थी। जिन लोगों ने 'संत तुकाराम' देखी है, उन्हें वह सीन ज़रूर याद होगा जिसमें विरोधियों की वजह से संत तुकाराम अपने सारे ग्रंथ नदी में बहा देते हैं। वह नदी इसी तालाबनुमा गढे में पानी भरकर फिल्माया गया था। इस गढे की गहराई बमुश्किल ४-५ फीट होगी। चारों तरफ इमली, बरगद और ऐसे ही दूसरे पेड़। लोगो को गांव का शॉट लेना हो या जंगल का या फिर मंदिर का। इसी जगह की मदद ली जाती है। शांत, सुकुनबख्श जगह।

विनेश और सुनील मेहरू जी ने दारू की दुकान भी खोज निकाली। एफटीआईआई के पास ही में है। लॉ कॉलेज रोड में एफटीआईआई से निकलते ही दाहिनी ओर मुड़ने पर बाजार जैसी जगह है। यहीं पर है तत्वसेवन की जगह।

उधर, एफटीआईआई के अहाते में ही पहाड़ी की तलहटी में एक हनुमान मंदिर है। जिसकी राह में ढेरों झाडि़यां है और जहां और मानव मल की बू से मुठभेड़ करते हुए ही जा पाएंगे। मंदिर वैसे साफ-सुथरा है।

एफटीआईआई में प्रभात स्टूडियों के वक्त की ढेरों निशानियां मौजूद है। वह स्टूडियों भी.. जिसमें काग़ज़ के फूल के गुरुदत्त के सबसे मार्मिक शॉट फिल्माए गए थे।

शाम में हम पांचों लोग डेक्कन जिमख़ाना के पास के मशहर चाय की दुकान 'गुडलक'में भी गए। इसी दुकान में गुरुदत्त साहब देवानंद के साथ आया करते थे। उस वक्त दोनों में से किसी को भी ब्रेक नहीं मिल पाया था। एफटीआईआई से डेक्कन जिमखाना के बीच जंगल हुआ करता था और दोनों महानुभाव साइकिल से गुडलक तक जाया करते थे। (बाद में इस बात की पुष्टि देव साहब ने गोवा में मुलाकात के दौरान भी की।) देव साहब और गुरुदत्त ने एक दूसरे से वायदा किया कि जो भी पहले हिट हो गया दूसरे को मदद करेगा। संभवतया देव साहब को पहले ब्रेक मिल गया और उनकी 'टैक्सी ड्राईवर' हिट हो गई। फिर भी उन्होंने अपना वायदा बिसराया नहीं और गुरुद्त्त के साथ 'बाज़ी' जैसी फिल्म की।

एफटीआईआई में रहते हुए ऐसी कई जानकारियों ने मुझे हैरान किया। कुछ की पुष्टि हुई है कुछ की बाकी है।

to be contd..

4 comments:

mahendra mishra said...

बहुत बढ़िया जानकारी पूर्ण आलेख धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बढ़िया जानकारी मिली एफ टी आई आई की.आभार.

yati lad said...

manjit ji ftii se judi har ek baat post kijiye aacha lagta hai padhna, dont know ab8 others lekin jab mai padhti hu to mai likhi huie har baat imagen karti hu apki likhne ki style b badiya hai n its informative.. jankari k liye dhanyavad waiting 4d next post

कुमार आलोक said...

wah guru sansmaran badhiyaa likhate ho. ftii ke aas paas mal mutra kaa dher bhee hai ..sunkar bura laga ..itanaa pratisthit sansthan aur is tarah kee baatein bahar kaisee chawee banegi hamaree