Friday, November 23, 2007

भारतीय पैनोरमा- अब आएगा मज़ा


इस बार के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में लेनिन राजेंद्र की रात्रि माझा ( रात की बारिश. मलयालम) और समीर चंदा की ऐक नदीर गोल्प (एक नदी की कहानी, बंगला) फिल्में भारतीय पैनोरमा से एशियन-अफ्रीकन और लैटिन-अमेरिकी प्रतिस्पर्धा खंड में भारतीय फिल्मों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इन दोनों फिल्मों को भारतीय पैनोरमा की २१ फिल्मों में से चुना गया है।


वैसे, फीचर और गैर-फीचर फिल्मों के लिए २१ फिल्मो के चयन के लिए जूरी के सदस्यों ने ११९ फीचर और १४९ गैर-फीचर फिल्में देखीं। भारतीय पैनोरमा में फीचर फिल्मों में ओपनिंग फिल्म होगी मलयालम की ओरे काडाल, जिसे निर्देशित किया है श्यामा प्रसाद ने। जबकि गैर-फीचर फिल्मों में ओपनिंग फिल्म बंगला की बाघेर बाच्चा होगी।


फीचर फिल्मों के भारतीय पैनोरमा में देखने लायक कुछ उल्लेखनीय फिल्मों के अगर नाम गिनाए जाएं, तो उनमें अडूर गोपाल कृष्णन की नाल्लू पेन्नूगल और भावना तलावार की धर्म अहम होगी। मिथुन चक्रवर्ती की शानदार अदाकारी में बनी ऐक नदीईर गल्प भी च्छी फिल्मों में शुमार की जा सकती है। बांगला फिल्मों की इस बार शानदार बहार फिल्मोत्सव में देखी जा सकती है, इनमें अर्जन दास की जा-रा वृष्टिते भिजेछीलो (जो बारिश में भींगे थे), बुद्ध देव दासगुप्ता की आमि, इयेसिन आर आमार मधुबाला आलोचकों को पसंद आने वाली फिल्में हैं।


पैनोरमा में फीचर फिल्मों में मराठी फिल्में भी ज़ोरदार हैं, गजेंद्र अहीरे की माई-बाप और विपिन नाडकर्णी की एवडे से आभाल , विशाल भंडारी की कालचक्र उम्मीदें जगाने वाली फिल्में हैं।


गैर फीचर फिल्मों की सीरीज़ में अशोक राणे की मस्ती भरा है समां, अडूर गोपाल कृष्णन की द डांस ऑफ इंचांटर्स, विपिन चौबल की मुबारक बेगम जैसी फिल्में निश्चय ही लोगों खासकर सीरियस दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान खींचने में कामयाब होंगी। लेकिन असली बात तो इन फिल्मों को देखने के बाद ही पता चल पाएगा।

टिप्पणी- अभी तक समारोह में जादू घुल नहीं पाया है। सब कुछ निपटा डालने जैसा नज़रिया लोगों के उत्साह पर पानी फेर रहा है।


मंजीत ठाकुर

1 comment:

बाल किशन said...

जानकारी के लिए धन्यवाद. मौका मिला तो मैं भी इनमे से कुछ फिल्में देखूंगा.